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मप्र में नगरीय निकायों के आम चुनाव कराने को लेकर असमंजस की स्थिति, राज्यपाल ने अभी तक संशोधन प्रस्ताव को नहीं दी मंजूरी

मप्र में नगरीय निकायों के आम चुनाव कराने को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। प्रदेश की 9 निकायों का कार्यकाल खत्म हो चुका है। 287 निकायों का कार्यकाल जनवरी में खत्म हो रहा है।

मप्र में नगरीय निकायों के आम चुनाव कराने को लेकर असमंजस की स्थिति,  राज्यपाल ने अभी तक संशोधन प्रस्ताव को नहीं दी मंजूरी
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Confusion over election of urban bodies in MP, Governor not yet approved the amendment proposal

भोपाल। मप्र में नगरीय निकायों के आम चुनाव कराने को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। प्रदेश की 9 निकायों का कार्यकाल खत्म हो चुका है। 287 निकायों का कार्यकाल जनवरी में खत्म हो रहा है। वहां हर हाल में चुनाव कराया जाना है। इस बीच राज्यपाल ने सरकार के संशोधन प्रस्ताव को होल्ड कर दिया है। मुख्यमंत्री सोमवार को राज्यपाल से मिले। उन्होंने सरकार का पक्ष रखा। किंतु अभी भी स्थिति कुछ साफ नहीं हो पाया है। 

राज्य सरकार प्रदेश के नगरीय निकायों में महापौर व अध्यक्षों का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराना चाहती है। इससे संबंधित संशोधन प्रस्ताव मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा गया है। किंतु अभी मंजूरी नहीं मिली है। मुख्यमंत्री कमलनाथ इस संबंध में राज्यपाल से दो बार मिल चुके हैं। सोमवार को देर शाम फिर राज्यपाल से मिलने राजभवन पहुंचे थे। वे करीब एक घंटे तक राजभवन में रहे। इस दौरान उनकी व राज्यपाल लालजी टंडन की करीब एक घंटे तक चर्चा हुई। इस दौरान बातचीत में कोई अन्य अिधकारी नहीं था। बाद में मुख्यमंत्री ने राजभवन से वापस आते वक्त मीडिया से कहा कि सांसद विवेक तन्खा का वक्तव्य उनका निजी विचार हो सकता है। इससे मप्र सरकार का कोई लेना देना नहीं है। 

जनसपंर्क मंत्री ने भी रखा अपना पक्ष

जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने अपने आवास पर प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि मुख्यमंत्री नाथ ने सोमवार को शाम राज्यपाल टंडन जी से राजभवन में सौजन्य भेंट किए हैं। उन्होंने नगरीय निकायों में महापौर के निर्वाचन के संबंध में राज्यपाल को विस्तृत जानकारी दिए। महापौर निवार्चन के अध्यादेश के संबंध में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्यपाल नगरीय निकाय में महापौर चुनाव के संबंध में राज्य के हित में निर्णय लेंगें। साथ ही यह भी कहा कि सांसद तन्खा का वक्तव्य उनके निजी विचार हो सकते है। यह विचार मध्यप्रदेश सरकार के नहीं हैं।

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