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मध्य प्रदेशः CM शिवराज ने चीफ जस्टिस को लिखा खत, रेप मामलों की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कराने की करी अपील

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने शिवराज सिंह चौहान ने भाजपा के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई दीपक मिश्रा को पत्र लिखकर बलात्कार के मामलों की बड़ी अदालतों में फास्ट्र ट्रैक सुनवाई या मौजूदा ढांचे में ही जल्द सुनवाई की व्यवस्था करने का आग्रह किया है।

मध्य प्रदेशः CM शिवराज ने चीफ जस्टिस को लिखा खत, रेप मामलों की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कराने की करी अपील
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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने शिवराज सिंह चौहान ने भाजपा के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई दीपक मिश्रा को पत्र लिखकर बलात्कार के मामलों की बड़ी अदालतों में फास्ट्र ट्रैक सुनवाई या मौजूदा ढांचे में ही जल्द सुनवाई की व्यवस्था करने का आग्रह किया है।

बलात्कार मामलों के लिए फास्ट ट्रेक कोर्ट में सुनवाई

प्रदेश में नाबालिग बालिकाओं से दुष्कर्म के कई मामले सामने आने के बाद मुख्यमंत्री चौहान ने सीजेआई को कल लिखे पत्र में कहा, देश की आबादी के एक बड़े हिस्से के प्रतिनिधि के रूप में मेरी आपसे प्रार्थना है कि ऐसे मामलों बलात्कार की त्वरित सुनवाई के लिये फास्ट ट्रैक हायर कोर्ट का गठन करने और सुनवाई की वर्तमान न्यायिक व्यवस्था में परिवर्तन कर दुष्कर्म के मामलों की सुनवाई को प्रमुखता दी जाये।

चीफ जस्टिस को लिखा पत्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में हाल ही में हुए दुष्कर्म के उन मामलों को ध्यान में रखते हुए आपको ये पत्र लिख रहा हूं, जिन्होंने समाज में भय, घृणा का माहौल और हंगामा मचा रखा है। उन्होंने कहा कि दुष्कर्म की इन घटनाओं ने सामान्य मानवीय के अंत:करण को झकझोर दिया है।

उन्होंने कहा, देश में मध्यप्रदेश ऐसा पहला राज्य था, जिसने विधेयक पास कराकर 12 वर्ष से कम उम्र की बच्ची से दुष्कर्म करने वाले दोषी को फांसी दिलाने का कानूनी प्रावधान किया। उन्होंने पत्र में आगे लिखा, कठोर कानूनी प्रावधानों के बावजूद दुष्ट प्रवृत्ति के अपराधियों पर इसका ठोस प्रभाव नहीं हुआ। उन्हें न्यायिक व्यवस्था से सजा मिलने का भय नहीं है।

मांग के समर्थन में दी दलील

अपनी मांग के समर्थन में उन्होंने कहा, इन्दौर दुष्कर्म केस के बारे में आप जानते होंगे, जिसमें 7 दिन में जांच पूरी कर 22 दिन में कोर्ट सुनवाई होने के बाद आरोपी को फांसी की सजा सुनाई गयी। अब मामले को हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में सुना जायेगा, ऐसे में ये नहीं कहा जा सकता कि पीड़िता को न्याय मिल गया।

मैं यह नहीं कहना चाहता कि आरोपी को निष्पक्ष कोर्ट सुनवाई का अधिकार नहीं है, लेकिन तेज गति से होने वाली न्यायिक प्रक्रिया, दुष्कर्म पीड़िता को मनोवैज्ञानिक दबाव से कुछ राहत दे सकती है और ये दूसरे मामलों के लिये भी उदाहरण बन सकती है।

इंदौर से लेकर मंदसौर रेप का दिया हवाला

मालूम हो, इन्दौर दुष्कर्म कांड में आरोपी ने 20 अप्रैल को तड़के माता पिता के पास सो रही तीन माह की मासूम बालिका का अपहरण करने के बाद दुष्कर्म किया और उसके बाद उसकी हत्या कर दी। इसके बाद, 26 जून को मंदसौर में स्कूल के बाहर से 8 वर्षीय बालिका का अपहरण करने के बाद उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया।

बालिका के गले में चाकू मारकर आरोपी उसे मरा समझकर झाड़ियों में फेंक गये। फिलहाल बालिका का इन्दौर के शासकीय एम वाय अस्पताल में इलाज चल रहा है और उसकी हालत खतरे से बाहर है।

इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके बाद, एक जुलाई को सतना जिले में 23 वर्षीय एक युवक द्वारा चार वर्षीय बालिका से बलात्कार की घटना भी सामने आयी है।(इनपुट भाषा)

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