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फटी रह गईं सबकी आंखें, जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने दिया अर्थी को कंधा, जाने क्या है पूरा मामला

कमजोर और अबला कही जाने वाली नारी जब समाज में चल रही पुरानी रूढ़ियों को तोड़ती है तो अपने उन दायित्वों का निर्वाहन भी बखूबी करती है। फिर चाहे वह पारिवारिक दायित्वों के निर्वाहन की बात हो या रूढ़िवादीता से हट कर सामाजिक दायित्वों के निर्वाहन की।

फटी रह गईं सबकी आंखें, जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने दिया अर्थी को कंधा, जाने क्या है पूरा मामला

कटनी। कमजोर और अबला कही जाने वाली नारी जब समाज में चल रही पुरानी रूढ़ियों को तोड़ती है तो अपने उन दायित्वों का निर्वाहन भी बखूबी करती है। फिर चाहे वह पारिवारिक दायित्वों के निर्वाहन की बात हो या रूढ़िवादीता से हट कर सामाजिक दायित्वों के निर्वाहन की। ऐसा ही एक उदाहरण कटनी जिले की विजयराघवगढ़ तहसील में देखने को मिला। जब आंगनबाड़ी महिलाओं ने अपनी साथी की असमय मृत्यु पर वो कर दिखाया जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।


दरअसल, विजयराघवगढ़ विकास खंड के ग्राम पंचायत अमेहटा की आंगनबाड़ी तीन की सहायिका प्रेमा कोल की अचानक हृदय गति रुक जाने से मृत्यु हो गई। दिवंगत महिला का पति बाबू लाल कोल कई साल से बीमार है। जिसकी दवाईयों का खर्चा और घर की जिम्मेदारी प्रेमा बाई के कंधों पर ही थी। जिसकी वजह उसकी घर की आर्थिक ठीक नहीं थी।

जब अपनी सहायिका के गुजर जाने की जानकारी सहयोगी कार्यकर्ताओं को मिली तो सबने मिलकर अंतिम संस्कार की क्रिया में होने वाले खर्च को मिलजुलकर पूरा किया व अपने सहयोगी को कंधा देकर नम आंखों से श्रद्धाजंलि दी। दिवंगत महिला का एक बेटा दस वर्ष व बेटी पंद्रह वर्ष की है।

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