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स्कूल को संवारने के लिए शिक्षक ने गांव - गांव जाकर इकट्ठे किए रुपए, कर्ज हुआ तो लोन लेकर चुकाया

नरसिंहपुर जिले के एक सरकारी स्कूल के एक शिक्षक ने प्रदेशभर के सभी सरकारी स्कूलों के लिए एक अदभुद मिशाल पेश की है। इस शिक्षक ने स्कूल के विकास के लिए दिन-रात एक कर दिए, गांव-गांव जाकर दो-दो तक रूपए एकट्ठे किए।

स्कूल को संवारने के लिए शिक्षक ने गांव - गांव जाकर इकट्ठे किए रुपए, कर्ज हुआ तो लोन लेकर चुकाया
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A teacher from Narsinghpur has presented an ideal model of education in MP

नरसिंहपुर। नरसिंहपुर जिले के एक सरकारी स्कूल के एक शिक्षक ने प्रदेशभर के सभी सरकारी स्कूलों के लिए एक अदभुद मिशाल पेश की है। इस शिक्षक ने स्कूल के विकास के लिए दिन-रात एक कर दिए, गांव-गांव जाकर दो-दो तक रूपए एकट्ठे किए। स्कूल को संवारने में खर्च इतना हो गया कि शिक्षक पर ही दो लाख रूपए का कर्ज हो गया, लेकिन वह रूके नही। इस दो लाख रूपए के कर्ज को उन्होने लोन लेकर जेब से चुकाया। नतीजन यह स्कूल आज राजकीय स्कूलों की सूची में पहले स्थान पर है और पूरे प्रदेश में नजीर बन रहा है।हम बात कर रहे हैं नरसिंहपुर जिले की गाडरवारा तहसील के अर्तंगत आने वाले शासकीय प्राथमिक शाला, तूमड़ा की। यह स्कूल लगभग 4 साल पहले उजाड़ था। जहां लगभग 34 बच्चे सिर्फ खाना खाने ही आते थे और शिक्षक भी अपने हिसाब से छुट्टी कर निकल जाते थे।


इस बीच हल्केवीर पटेल प्रधानपाठक के रूप में इस स्कूल में आए तो स्कूल की दशा देखकर दंग रह गए। क्योंकि स्कूल में बच्चे उतने ही थे, जिससे यहां के शिक्षकों की नौकरी चलती रहे। स्कूल में संसाधनों की बेहद कमी थी। यह सब देखकर तकलीफ हुई तो स्कूल को संवारने की ठान ली। हल्के वीर पटेल बताते हैं कि जब रविवार को भी वह स्कूल आने लगे और परिसर में बगिया सजाने में लग गए तो धीरे-धीरे स्कूल स्टाफ और ग्रामीणों ने भी सहयोग करना शुरू कर दिया। ग्रामीणों से दो रुपए से लेकर दस रुपए चंदा लेने का अभियान चलाया गया। फर्नीचर, रंग रोगन सहित अन्य व्यवस्थाएं दुरूस्त की गई। स्कूल की व्यवस्थाओं को सुधारने में समझ ही नही आया कि कब 2 लाख रूपए के कर्जदार हो गए। अधिकतर लोगो से स्कूल को संवारने के लिए मदद ले चुके थे इसलिए फिर से मदद मांगना सही नही लगा तो 2017 में दो लाख रूपए का लोन लेकर कर्ज चुकाया। गांव के ही पेंटर रतन पटेल ने भी इस स्कूल के लिए श्रमदान करते हुए यहां नि:शुल्क पेंटिंग बनाई। हमारी चार साल की मेहनत रंग लाई और अब इस स्कूल को राजकीय मॉडल स्कूलों की सूची मे रखा गया है। यहां पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 34 से बढ़कर 100 के पार हो गई है।

देश-विदेश के देखने आते हैं स्कूल :

इस स्कूल को स्कूल शिक्षा विभाग ने राजकीय मॉडल स्कूल की सूची में शामिल किया है। वहीं शिक्षक हल्के वीर पटेल को राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान पुरू स्कार दिया गया है। इनकी मेहनत का नतीजा यह है कि आज साफ-सफाई और बच्चों को प्रकृति से जोड़े रखने के लिए क्या किया जा सकता है, वह इस स्कूल से सीखा जा सकता है। इस स्कूल मे स्कूल में लगभग 200 पौधे लगाए गए हैं जिनमें से अधिकतर पौधे पेड़ बन गए हैें। बच्चों के खेलने के लिए पूरा बगीचा तैयार किया गया है। इस स्कूल को देखने के लिए अमेरिका सहित कई देश-विदेश के लोग आते हैं।

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