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ऐसा मंदिर जहां 'मां' को लगता है शराब का भोग, भक्तों में बंटता है मदिरा का प्रसाद, कलेक्टर खुद लगाते हैं देवी को भोग...

नवरात्र में जहां एक ओर लोग मांस और मदिरा के सेवन से बचते हैं, वहीं मध्यप्रदेश के उज्जैन में एक मंदिर ऐसा भी है जहां माता को मदिरा पिलाई जाती है। इतना ही नहीं इस मंदिर में आने वाले भक्तों को भी प्रसाद के रूप में शराब ही बांटी जाती है।

ऐसा मंदिर जहां मां को लगता है शराब का भोग, भक्तों में बंटता है मदिरा का प्रसाद, कलेक्टर खुद लगाते हैं देवी को भोग...
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राहुल यादव। नवरात्र में जहां एक ओर लोग मांस और मदिरा के सेवन से बचते हैं, वहीं मध्यप्रदेश के उज्जैन में एक मंदिर ऐसा भी है जहां माता को मदिरा पिलाई जाती है। इतना ही नहीं इस मंदिर में आने वाले भक्तों को भी प्रसाद के रूप में शराब ही बांटी जाती है। महाअष्टमी के अवसर पर लोक कल्याण के साथ सुख, समृद्धि के लिए आज 24 खंभा माता मंदिर में नगर पूजा का आयोजन किया गया। इसकी शुरुआत शासकीय पूजन के साथ होती है, जिसमें खुद कलेक्टर शशांक मिश्र ने मां महामाया और महालाया को मदिरा का भोग लगाया।


इसके बाद सरकारी अमले ने ढोल-ढमाकों के साथ नगर के 40 देवी-देवताओं और भैरव मंदिरों में शराब की धार चढ़ाते हुए नगर पुजन यात्रा की शुरूआत की। इस दौरान तांबे के कलश में मदिरा लेकर एक सेवक चल समारोह के आगे चलता है जिससे मदिरा की धार लगातार जारी रहती है। नगर पूजा के दौरान 27 किलोमीटर की मदिरा की धार लगाई जायेगी। माता के इस मंदिर में सुबह से ही पूजा शुरू हो जाती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। दिनभर चलने वाले नगर पूजन के बाद रात करीब 8 बजे गढ़कालिका मंदिर पर अंतिम देवी के रूप में पूजा के पश्चात अंकपात के समीप हांडी फोड भैरव मंदिर में नगर पूजा का समापन होगा। पूजन के बाद प्रसाद के रूप में सभी को मदिरा वितरित की गई।


हजारों साल पुरानी परंपरा

शारदीय नवरात्रि में उज्जैन में नगर पूजा की परंपरा हजारों साल पुरानी है। मान्यता है कि उज्जयिनी के महान सम्राट विक्रमादित्य लोक कल्याण और राज्य की प्रजा की सुख शांति और समृद्धि के लिये नगर पूजा करते थे। तभी से नगर की सीमाओं पर स्थित इन देवी मंदिरों में पूजा की ये परंपरा चली आ रही है। महाकाल वन के मुख्य प्रवेश द्वार पर विराजित माता महामाया व माता महालाया चौबीस खंभा माता मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हैं।


यहां पर मंदिर के भीतर 24 काले पत्थरों के खंभे हैं, इसीलिए इसे 24 खंभा माता मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह उज्जैन नगर में प्रवेश करने का प्राचीन द्वार हुआ करता था। पहले इसके आसपास परकोटा हुआ करता था। तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध उज्जैन या प्राचीन अवंतिका के चारों द्वार पर भैरव तथा देवी विराजित हैं, जो आपदा.विपदा से नगर की रक्षा करते हैं। चौबीस खंभा माता भी उनमें से एक हैं। यह मंदिर करीब 1000 साल पुराना है।

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