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दस साल से चल रहा था रैकेट, हनी ट्रैप में फंसाए 12 IAS-IPS वसूलने थे 12 करोड़, गिरोह के लिए बनाया था वाट्सअप ग्रुप

सेक्स परोसकर उसका वीडियो बनाने और फिर उसकी दम पर संबंधित को ब्लैक मेल करने का हनी ट्रेप धंधा भोपाल इंदौर में पिछले 10 साल से चल रहा था। क्योंकि इंदौर में दर्ज हुए हनी ट्रैप ब्लैक मेलिंग के केस में आरोपी पांच महिलाओं से जो मोबाइल, लैपटॉप, पेन ड्राइव आदि बरामद हुए हैं उनमें पॉर्न वीडियो वर्ष 2009 तक के भी हैं।

दस साल से चल रहा था रैकेट, हनी ट्रैप में फंसाए 12 IAS-IPS  वसूलने थे 12 करोड़, गिरोह के लिए बनाया था वाट्सअप ग्रुप
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भोपाल। सेक्स परोसकर उसका वीडियो बनाने और फिर उसकी दम पर संबंधित को ब्लैक मेल करने का हनी ट्रेप धंधा भोपाल इंदौर में पिछले 10 साल से चल रहा था। क्योंकि इंदौर में दर्ज हुए हनी ट्रैप ब्लैक मेलिंग के केस में आरोपी पांच महिलाओं से जो मोबाइल, लैपटॉप, पेन ड्राइव आदि बरामद हुए हैं उनमें पॉर्न वीडियो वर्ष 2009 तक के भी हैं। खास बात ये है कि ज्यादातर वीडियो वर्ष 2014 के बाद ही बने हैं। अब जांच का आधार ये ही वीडियो हैं। साथ ही इन आरोपी महिलाओं के मोबाइल की कॉल डिटेल्स को पुलिस व जांच एजेंसियां खंगाल रही हैं। इनसे ही निकलेगा कि देह सुख के चक्कर में कौन-कौन रसूखदार मंत्री-नेता, अफसर इनके जाल में फंसे रहे।

सूत्र बताते हैं कि इन महिलाओं के देहजाल में 12 से अधिक आईएएस और आईपीएस अफसर आ चुके थे। जिनमें से ये कुछ को ब्लैक मेल कर रही थीं, जबकि कुछ को करने की तैयारी थी। इन जालसाज महिलाओं श्वेता (48) पति स्वप्निल जैन निवासी रेवेरा टाउनशिप भोपाल, श्वेता (39) पति विजय जैन निवासी मिनाल रेसीडेंसी भोपाल, बरखा (34) पति अमित सोनी निवासी कोटरा सुल्तानाबाद भोपाल, आरती (29) पति पंकज दयाल निवासी मिनाल रेसीडेंसी भोपाल, मोनिका (18) पिता लाल यादव निवासी सवस्या नरसिंहगढ़ ने एक व्हाट्सअप ग्रुप बनाया था। इसमें ये अपने टारगेट के संबंध में एक दूसरे को सूचनाएं देती थीं।

श्वेता रेल्वे और डिफेंस सेक्टर की सप्लायर

इस की आरोपी श्वेता जैन की फेसबुक प्रोफाइल भी है। जिसमें वह रेल्वे और डिफेंस सेक्टर की सप्लायर है। उसने खुद को एटीएलटीएचआई कंपनी की ऑनर लिखा है। इस कंपनी की वेबसाइट में है कि यह कंपनी इलेक्ट्रिक सामान समेत टेप बनाती है। इस कंपनी के प्रोडक्ट की सप्लाई इंडस्ट्रियल, ऑटोमोटिव सेक्टर में भी होती है। कंपनी के कॉपोर्रेट आफिस का पता बगरौदा इंडस्ट्रियल एरिया, बंगरसिया भोपाल दिया है। सूत्र बताते हैं कि श्वेता की इस कंपनी में भागीदारी है।

मंत्रियों अफसरों को देतीं थी कॉल गर्ल्स का ऑफर

- आरोपी आरती दयाल श्वेता की किरायदार हुआ करती थी। जब ये मीनाल रेसिडेंसी में निवास करती थीं, उस समय आरती श्वेता के संपर्क में आई। उसके बाद ही उसका हाईप्रोफाइल लोगों से जुड़ाव हुआ।

- आरोपी महिलाओं से मिले मोबाइल्स में आईएएस-आईपीएस अफसरों और बीजेपी-कांग्रेस के कई नेताओं के नंबर्स और कॉल डिटेल्स पाए गए हैं। जिनसे इस केस में कई खुलासे होने की उम्मीद की जा सकती है।

- ये मंत्री और अधिकारियों के पास एनजीओ के काम के बहाने जाती थीं। फिर अपना मूल काम प्रारंभ कर देती थीं। ये उन्हें सुंदर से सुंदर कॉलगर्ल्स का ऑफर देती थीं। फिर डिमांड पूरी कर देती थीं।

कोर्ट ने नहीं दिया रिमांड, न्यायिक हिरासत में भेजा

- इंदौर की पलासिया थाना पुलिस शुक्रवार की शाम चार बजे हनी ट्रेप केस की आरोपी बरखा पति अमित सोनी, श्वेता पति विजय जैन व श्वेता पति स्वप्निल जैन को अदालत ले गई। क्योंकि इनकी रिमांड अवधि पूरी हो गई थी।

- फिर इंदौर कोर्ट में कक्ष क्रमांक 25 में इस केस की सुनवाई हुई। जहां इन तीनों को अदालत में शुक्रवार की शाम चार बजे पेश किया गया। यहां न्यायिक दंडाधिकारी आरके पाटीदार की अदालत में सुनवाई चली। पुलिस ने इन्हें दोबारा रिमांड पर मांगा।

- अदालत में अभियोजन ने अपना तर्क दिया कि इस मामले में कुछ वीडियो इन आरोपियों से मिले हैं। इनसे पूछताछ होना शेष है। क्योंकि ये वीडियो कब बने, कहां बने, यह जानना है। अभियोजन ने यह भी तर्क रखा कि इनके कब्जे से मोटी राशि भी जब्त हुई है। जिसमें यह पूछताछ भी होनी है कि यह इतनी बड़ी राशि इनके पास कहां से आई।

- यहां इन आरोपी महिलाओं के वकीलों ने पुलिस रिमांड का विरोध किया। अदालत में श्वेता पति विजय जैन की ओर से एडवोकेट धर्मेंद्र गुर्जर, बरखा पति अमित सोनी की ओर से एडवोकेट एसके वर्मा और आनंद सोसरिया, श्वेता पति स्वप्निल जैन की ओर से एडवोकेट अमरसिंह राठौर ने पुलिस रिमांड के विरोध में अपने-अपने तर्क दिए।

- आरोपी महिलाओं के अभिभाषकों ने अदालत को बताया कि उनके पक्षकार का मामले से कोई लेना.देना नहीं है। इस मामले में पुलिस मोबाइल और लैपटॉप पहले ही जब्त कर चुकी है। इसके अलावा मुख्य आरोपी 22 सितंबर तक पुलिस रिमांड पर हैं।

- यहां बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा कि पुलिस ने उनकी क्लाइंट्स को तीन दिन पहले पकड़ा थाए लेकिन पुलिस ने गिरफ्तारी नहीं दिखाई। इसके अलावा कोर्ट इन्हें गुरुवार को एक दिन के रिमांड पर पुलिस को दे ही चुकी है। तो अब फिर से रिमांड दिए जाने का कोई मतलब नहीं है।

- दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया। फिर देर शाम आदेश जारी किया। न्यायाधीश ने तीनों आरोपियों को पुलिस रिमांड पर देने से इंकार किया। इन्हें चार अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने का वारंट बना दिया।

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