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UP Corona Death: कोरोना से शिक्षकों की मौतों पर योगी सरकार और शिक्षक संघ आमने-सामने, एक-दूसरे पर लगा रहे बड़े आरोप

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ का कहना है कि प्रदेश भर में चुनावी ड्यूटी देने वाले 1,621 शिक्षकों, शिक्षा मित्रों और अन्य कर्मचारियों की कोरोना से मौत हुई है। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ऐसे कर्मचारियों की संख्या महज तीन बता रही है। जानिये पूरा मामला...

UP Corona Death: कोरोना से शिक्षकों की मौतों पर योगी सरकार और शिक्षक संघ आमने-सामने, एक-दूसरे पर लगा रहे बड़े आरोप
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प्रतीकात्मक तस्वीर। 

उत्तर प्रदेश में हाल ही में संपन्न पंचायत चुनावों में ड्यूटी देने वाले कई कर्मचारियों की कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के बाद हुई मौतों को लेकर योगी सरकार और शिक्षक संघ आमने-सामने आ गए हैं। शिक्षक संघ जहां 1681 कर्मचारियों की कोरोना से मौत के दावे कर रहा है, वहीं योगी सरकार का कहना है कि ऐसे कर्मचारियों की संख्या केवल तीन है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी का कहना है कि प्रदेश सरकार ने चुनावी ड्यूटी में लगे कर्मचारी की मौत होने पर मुआवजा देने के लिए जो मानक तैयार किए थे, उसके अनुसार केवल तीन शिक्षकों की मौत हुई है। शिक्षक संघ ने मृतकों की जो सूची दी है, कैसे पता चलेगा कि वे कब संक्रमित हुए। सूची में शामिल सभी लोगों की मौत को चुनाव ड्यूटी के दौरान हुई मौत नहीं माना जा सकता। इसे लेकर पहले से मानक तैयार हैं।

उधर, बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी प्रेस नोट में भी कहा गया है कि मतगणना में लगे कर्मचारियों के आवास से ड्यूटी स्थल तक पहुंचने और फिर ड्यूटी समाप्त कर वापस निवास स्थान तक पहुंचने के दौरान तीन कर्मचारियों की मौत कोरोना संक्रमण से हुई है। प्रेसनोट में तीन पीड़ित परिवारों को अनुग्रह राशि का भुगतान किए जाने का आश्वासन भी दिया गया है।

शिक्षक संघ ने कहा, सरकार दिखा रही संवेदनहीनता

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा का कहना है कि प्रदेश सरकार का यह गैरजिम्मेदाराना रवैया सरकार की संवेदनहीनता को भी दर्शा रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार से सवाल पूछा कि अगर चुनावी ड्यूटी के दौरान किसी कर्मचारी की संक्रमण से मौत होती तो क्या यह मान लिया जाए कि सरकार ने जानबूझकर ऐसे व्यक्ति को ड्यूटी पर लगाया, जो कि पहले से कोरोना संक्रमित था। उन्होंने दूसरे सवाल में पूछा कि अगर ड्यूटी खत्म करने के बाद घर पर किसी कर्मचारी की कोरोना संक्रमण से मौत हुई है तो क्या यह नहीं माना जाना चाहिए कि वो ड्यूटी के दौरान ही इस महामारी की चपेट में आया होगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार केवल झूठ बोल रही है, लेकिन हम दुनिया से जा चुके अपने साथियों के परिजनों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि मृत शिक्षक साथियों और अन्य कर्मचारियों के आश्रितों को उनका हक दिलाने के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ी जाएगी।

1681 कर्मचारियों की मौत का दावा

बता दें कि उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ ने 16 मई को सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कहा था कि प्रदेश भर में चुनावी ड्यूटी देने वाले 1,621 शिक्षकों, शिक्षा मित्रों और अन्य कर्मचारियों की कोरोना संक्रमण से मौत हुई है। पत्र के साथ एक सूची भी संलग्न की गई थी। साथ ही, इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के अनुरूप कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वाले कर्मचारियों के आश्रितों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की थी।

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