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यूपी में नॉन ब्रांडेड आटा महंगा होने पर भड़के राकेश टिकैत, मोदी सरकार को चेतावनी देकर कहा- अब आंदोलन एकमात्र रास्ता

उत्तर प्रदेश के बाजारों में नॉन ब्रांडेड आटा, मैदा और सूजी के दाम बढ़ने पर किसान नेता राकेश टिकैत ने मोदी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने किसानों और जनता के साथ ठगी की है। आगे पढ़िये क्या कहा...

यूपी में नॉन ब्रांडेड आटा महंगा होने पर भड़के राकेश टिकैत, मोदी सरकार को चेतावनी देकर कहा- अब आंदोलन एकमात्र रास्ता
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उत्तर प्रदेश में नॉन ब्रांडेड आटा, सूजी और मैदा की कीमत बढ़ने पर भड़के किसान नेता राकेश टिकैत। 

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बाजारों में नॉन ब्रांडेड आटा, मैदा और सूजी के दाम बढ़ने पर भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने मोदी सरकार (Modi Government) पर प्रहार किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का नाम लिए बिना कहा है कि गरीबों के मुंह से निवाला छीना जा रहा है। इससे किसान और गरीब, दोनों ही मरेंगे। यही नहीं राकेश टिकैत ने अपने हकों के लिए आंदोलन को ही एकमात्र रास्ता बता दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक किसान नेता राकेश टिकैत ने अपने ट्वीट में लिखा, 'कृषि उपज को पूंजीपतियों के हवाले कर मोदी सरकार ने किसान-आम जनता को ठगा। गेहूं खरीद में प्राइवेट प्लेयर्स ने काटी चांदी। अब नॉन ब्रांडेड आटा चावल सूजी पर जीएसटी लगा गरीब के मुंह से छीना निवाला। इससे किसान और गरीब दोनों मरेंगे। हकों के लिए आंदोलन ही एक रास्ता।'

राकेश टिकैत का यह ट्वीट भी पिछले ट्वीट की तरह वायरल हो रहा है। यहां भी ज्यादातर ट्विटर यूजर्स राकेश टिकैत पर निशाना साध रहे हैं। ट्विटर यूजर नवीन अग्रवाल ने लिखा, 'तब कुछ नही था, जब एक किवंटल गेहूं 3 तोले सोने के बराबर करने को बोल रहा था। तब देश में गरीब नहीं थे क्या...।' जय भारत नामक यूजर ने लिखा, 'क्या बात है आजकल सिर्फ आंदोलन आंदोलन नाम ले रहे हैं...आंदोलन कर नहीं रहे हैं, आंदोलन के नाम पर सरकार पर दबाव और अपना प्रभाव बनाकर रखना चाहते हैं, राजनीतिक पार्टी के नेता हैं या फिर किसानों के नेता...समझ में ही नहीं आता, किसान यूनियन को अब इनसे दूरी बनाने की जरूरत है।'


डीके अग्रवाल ने लिखा, 'तुम क्यो नही खरीदी कर लेते?? बस सोशल मीडिया में ही किसान हितैषी हो क्या??? किसानों को खुला बाजार मिल गया था, आजाद भारत में पहली बार किसानों के हित में कानून बनाया था @narendramodi सरकार ने, उसको भी तेरे जैसे किसानों के नाम में राजनीति करने वालों ने लागू नहीं होने दिया।' तो वहीं मुकेश 1970 ने लिखा, 'तो कब कर रहे हो आंदोलन?' इसी प्रकार ज्यादातर अन्य यूजर्स भी ऐसे ही प्रतिक्रियाएं देकर राकेश टिकैत पर हमला बोल रहे हैं।

यह है कीमत बढ़ने का कारण

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नॉन ब्रांडेड आटा, मैदा और सूजी की कीमतों में बढ़ोतरी को जीएसटी बताया जा रहा है। जानकारों के हवाले से कहा जा रहा है कि 18 जुलाई से इन चीजों पर 5 फीसदी जीएसटी लगने से दाम में बढ़ोतरी हुई है। कुछ लोगों का कहना है कि कालाबाजारी के कारण दाम बढ़ गए हैं। यूपी में 60 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य था, लेकिन 3.63 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स में जानकारों के हवाले से कहा गया है कि अगर किसानों ने मंडी में गेहूं बेची होती तो यह स्थिति नहीं बनती। अभी तक किसानों के पास अपना गेहूं है, लेकिन यह स्टॉक खत्म होते ही निशुल्क राशन पर निर्भर 60 लोग भी बाजार से अनाज खरीदारी के लिए बाध्य हो जाएंगे। इससे नवंबर माह तक दाम और बढ़ जाएंगे।

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