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आगरा में ऑक्सीजन मॉकड्रिल करने वाला अस्पताल होगा सील, मरीजों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू, शुरुआती जांच में चौंकाने वाला खुलासा

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लेकर पारस हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रशासन का कहना है कि हॉस्पिटल में हुई एक-एक मरीज की मौत की जांच की जाएगी। हॉस्पिटल में कथित ऑक्सीजन क्राइसिस से अभी तक सात मौतों की पुष्टि हो चुकी है।

आगरा में ऑक्सीजन मॉकड्रिल करने वाला अस्पताल होगा सील, मरीजों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू, शुरुआती जांच में चौंकाने वाला खुलासा
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आगरा में ऑक्सीजन क्राइसिस से पैदा होने वाले हालात जांचने के लिए कथित मॉकड्रिल करने पर पारस हॉस्पिटल को सील करने का आदेश जारी कर दिया गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लेकर इस बाबत आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देश जारी होते ही अस्पताल से मरीजों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जिला प्रशासन ने अपनी प्राथमिक जांच में पाया है कि जिस दिन पारस हॉस्पिटल में कथित ऑक्सीजन मॉकड्रिल की गई थी, उस वक्त ऑक्सीजन किल्लत नहीं थी। प्रशासन ने पाया है कि पारस हॉस्पिटल में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन के सिलेंडर थे। पारस हॉस्पिटल की ओर से ऑक्सीजन सिलेंडरों की कोई डिमांड भी नहीं भेजी गई थी। इस बारे में जिलाधिकारी ने मामले की जांच दो दिन के भीतर पूरी करने की बात कही है। अस्पताल में हुई एक-एक मौत की जांच की जाएगी।

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यह हमारे खिलाफ साजिश

पारस अस्पताल के संचालक ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया है। कहा है कि यह उनके खिलाफ एक साजिश है। एक न्यूज चैनल से बात करते हुए पारस अस्पताल के संचालक ने कहा कि जिस वक्त की यह घटना है, उस वक्त केवल आगरा या उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में ऑक्सीजन की कमी चल रही थी। 12-12 घंटे बाद भी ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं मिल रही थी। उन्होंने दोहराया कि उन्होंने ऑक्सीजन की सप्लाई बंद नहीं की थी, केवल ऑक्सीजन के फ्लो मीटर से चेक किया था कि किस मरीज को कितनी ऑक्सीजन की जरूरत है।

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कई सवालों का नहीं दे पाए जवाब

मीडिया से बातचीत के दौरान अस्पताल संचालक कई सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। वो वायरल वीडियो में जिस तरह से बात करते सुनाई दे रहे हैं, वो अब उनके अबके बयानों से मेल नहीं खा रही। प्रशासन भी सकते में है कि जब पारस अस्पताल में पर्याप्त संख्या में ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध थे तो मरीजों को अपने-अपने सिलेंडर लाने के लिए क्यों बोला जा रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस संबंध में दो दिन के भीतर जांच पूरी करने के आदेश दिए गए हैं, जिसके बाद उम्मीद है कि सब सवालों के जवाब सामने आ जाएंगे।

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