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बरसाना में आज बरसेंगे लड्डू, लठ्ठमार होली के लिए नंदगांव पहुंचेगा न्यौता, जानिये कैसे शुरू हुई परंपरा

ब्रजभूमि मथुरा, वृंदावन, नंदगांव, गोकुल और बरसाना की होली केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में मशहूर है। यही कारण है कि यहां पर होली मनाने विदेशों से भी अच्छी खासी संख्या में लोग पहुंचते हैं। देश के अन्य हिस्सों में जहां होली केवल एक दिन खेली जाती है, वहीं बृज भूमि पर होली खत्म होने के 2-3 बाद तक रंगों का यह उत्सव जारी रहता है।

बरसाना में आज बरसेंगे लड्डू, लठ्ठमार होली के लिए नंदगांव पहुंचेगा न्यौता, जानिये कैसे शुरू हुई परंपरा
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बरसाना में आज शाम को खेली जाएगी लड्डू होली। 

कृष्ण नगरी अयोध्या में होली का उत्सव शुरू हो चुका है। आज बरसाना से राधा दासी सखी होली का न्यौता लेकर नंदगांव जा रही हैं। राधा दासी सखी अपने साथ गुलाल, प्रसाद, पान बीड़ा व इत्र फुलेल लेकर जाएंगी और नंदगांव के हरियारों को बरसाना आकर होली खेलने का निमंत्रण देंगी। नंदभवन में उनका भव्य आदर सत्कार होगा। शाम को नंदगांव से एक पांडा (संदेश वाहक) बरसाना आकर संदेश देगा कि बरसाना में होली खेलने का निमंत्रण स्वीकार है। पांडा का भव्य सत्कार किया जाएगा। इसके बाद लड्डूओं की होली शुरू हो जाएगी।

लड्डू होली की परंपरा के पीछे एक पौराणिक कथा है। मान्यता है कि द्वापर युग में बरसाने से नंदगांव न्यौता भेजा गया था कि इस बार होली उनके यहां आकर मनाएं। राधारानी के पिता वृषभानुजी के न्यौते को कान्हा के पिता नंद बाबा ने इस न्यौते को स्वीकार कर लिया। निमंत्रण मिलने के बाद एक पांडा के हाथों निमंत्रण स्वीकार का संदेश भेजा गया। बरसाना में वृषभानजी ने पांडा का भव्य स्वागत किया और थाल में लड्डू खाने को दिए। इसी बीच गोपियों ने पांडा को गुलाल लगा दिया। पांडा ने भी गोपियों को लड्डूओं से मारना शुरू कर दिया। लड्डू होली की परंपरा तभी से चली आ रही है, जिसे बरसाना और नंदगांव के लोग आज भी शिद्दत और पूरी आस्था से निभाते हैं।

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