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यूपी के देवरिया में कराई गई 'चुनावी शादी', नई नवेली दुल्हन से लड़ाएंगे चुनाव, पूरी कहानी बेहद दिलचस्प

पंचायत चुनाव के लिए जारी नई आरक्षण सूची ने प्रदेश के कई जिलों में ग्राम राजनीति को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। विशेषकर उन लोगों को ज्यादा दिक्कतें आ रही हैं, जिनके पास ग्राम प्रधानी है, लेकिन अब उनकी सीट किसी अन्य वर्ग के लिए आरक्षित हो गई है। ऐसे में कुछ लोग जहां मायूस होकर बैठ गए हैं, वहीं कई लोग अन्य जुगाड़ अपनाने की सोच रहे हैं।

यूपी के देवरिया में कराई गई चुनावी शादी, नई नवेली दुल्हन से लड़ाएंगे चुनाव, पूरी कहानी बेहद दिलचस्प
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प्रतीकात्मक तस्वीर। 

उत्तर प्रदेश के देवरिया में चुनावी शादी चर्चा का विषय बनी है। यहां एक सामान्य वर्ग के दूल्हे की शादी ओबीसी वर्ग की महिला से केवल इसलिए करा दी गई ताकि नई नवेली दुल्हन से चुनाव लड़ाकर ग्राम प्रधानी अपने परिवार के पास रखी जा सके। जानकारों की मानें तो महिला सामान्य वर्ग में शादी करने के बाद भी ओबीसी वर्ग से आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने के योग्य है। यही कारण है कि इलाके के लोग इस शादी को अनोखा मान रहे हैं।

दरअसल, पंचायत चुनाव के लिए जारी नई आरक्षण सूची ने प्रदेश के कई जिलों में ग्राम राजनीति को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। विशेषकर उन लोगों को ज्यादा दिक्कतें आ रही हैं, जिनके पास ग्राम प्रधानी है, लेकिन अब उनकी सीट किसी अन्य वर्ग के लिए आरक्षित हो गई है। ऐसे में कुछ लोग जहां मायूस होकर बैठ गए हैं, वहीं कई लोग अन्य जुगाड़ अपनाने की सोच रहे हैं।

ऐसा ही एक मामला देवरिया के तरकुलवा विकास खंड के नारायणपुर गांव से सामने आया। यह सीट पहले सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित थी, लेकिन नई आरक्षण सूची जारी होने के बाद यह सीट ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित कर दी गई। सीट ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित होने पर चुनाव की तैयारी कर रहे सरफराज की उम्मीदों को गहरा झटका लगा। सरफराज सामान्य वर्ग से हैं, लिहाजा तय मापदंड के अनुरूप वे और उनके परिवार का कोई भी सदस्य चुनाव नहीं लड़ सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरफराज ने अपने बेटे सेराज की शादी ओबीसी वर्ग की लड़की से कराने की सोची ताकि वो अपनी बहु को चुनाव लड़ा सकें। उन्होंने तलाश शुरू की और अपने ही समुदाय में ओबीसी वर्ग से आने वाली लड़की से बेटे सेराज की शादी करा दी। सरफराज ने मीडिया के समक्ष खुद माना कि उन्होंने ये शादी इसलिए कराई ताकि अपनी बहु को ग्राम पंचायत का चुनाव लड़ा सकें। वे चाहते हैं कि ग्राम प्रधानी उनके परिवार के ही किसी सदस्य के पास रहे। जानकारों का कहना है कि शादी के बाद भी लड़की की जाती नहीं बदलती। ऐसे में सामान्य वर्ग के परिवार में शादी होने के बाद भी ओबीसी वर्ग की बहु आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ सकती है।

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