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रामलला की शरण में पहुंचे नरेश टिकैत, बोले- बंगाल में भाजपा के खिलाफ प्रचार करेंगे, पीएम मोदी के लिए मांगी...

भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने खुद को रघुवंशी बताते हुए कहा कि सरकार किसानों की बात नहीं सुन रही, लेकिन रामलला की बात तो सुनेगी। उन्होंने भगवान राम से प्रधानमंत्री मोदी के लिए सद्बुद्धि मांगी है ताकि पीएम किसानों की समस्याओं को समझ सकें। किसान नेता ने और क्या कहा, पेश है ये रिपोर्ट...

रामलला की शरण में पहुंचे नरेश टिकैत, बोले- बंगाल में भाजपा के खिलाफ प्रचार करेंगे, पीएम मोदी के लिए मांगी...
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प्रतीकात्मक तस्वीर। 

केंद्र के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली और आसपास के राज्यों में विरोध प्रदर्शन कर रहे किसान जल्द ही बंगाल जाकर भाजपा के खिलाफ प्रचार अभियान में शामिल होंगे। इसके लिए पूरी रणनीति तैयार की जा रही है। गुरुवार की सुबह अयोध्या पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने इस पर मीडिया से बात की।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नरेश टिकैत ने कहा कि किसान इतने लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार कोई बात सुनने को ही तैयार नहीं है। हमने तय किया है कि बंगाल जाकर भाजपा के खिलाफ प्रचार अभियान में हिस्सा लेंगे। बंगाल के लोगों को किसानों की हालत बताकर विनती की जाएगी कि किसी को भी वोट दें, बस भाजपा को न दें क्योंकि इनकी कथनी और करनी में फर्क है।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार दबाव बना रही है कि धरना प्रदर्शन खत्म करें। अगर हमने धरना प्रदर्शन खत्म कर दिया तो किसानों को क्या जवाब देंगे। सुप्रीम कोर्ट चाहे तो धरना प्रदर्शन उठवा दे। हम भी बातचीत के पक्ष में हैं, लेकिन बातचीत किसी दबाव में नहीं होनी चाहिए। किसानों पर दर्ज मामले वापस होने चाहिए। दिल्ली में जो कुछ हुआ, उसका दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए।

भगवान राम से मांगी पीएम के लिए सद्बुद्धि

पहली बार अयोध्या पहुंचे नरेश टिकैत ने खुद को रघुबंशी बताते हुए कहा कि अयोध्या में हमारे पूर्वजों का राम मंदिर बन रहा है। हम सभी इसके निर्माण में सहयोग कर रहे हैं। टिकैत बोले कि सरकार हमारी नहीं सुन रही, लेकिन रामलला की तो सुनेगी। मैंने रामलला से प्रधानमंत्री मोदी के लिए सद्बुद्धि मांगी है ताकि वे किसानों की समस्याओं को समझ सकें। बता दें कि नरेश टिकैत बस्ती में किसान महापंचायत में भी हिस्सा लेंगे। पूर्वांचल में भाकियू की यह पहली किसान महापंचायत है।

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