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Gyanvapi Masjid Case : ज्ञानवापी मस्जिद में जुमे की नमाज के लिए भीड़ उमड़ी, वाजु करके न आने वालों को दी अलग जगह

अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने मुस्लिम समुदाय से अपील की थी कि जुमे की नमाज के लिए घर से ही वाजु करके आएं और सीमित संख्या में आएं। बावजूद इसके न केवल भारी भीड़ उमड़ी बल्कि कई लोग वाजु करके भी नहीं आए।

Gyanvapi Masjid Case : ज्ञानवापी मस्जिद में जुमे की नमाज के लिए भीड़ उमड़ी, वाजु करके न आने वालों को दी अलग जगह
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ज्ञानवापी मस्जिद की फाइल फोटो। 

वाराणसी ज्ञानवापी मस्जिद केस (Gyanvapi Masjid Case) की सुनवाई जिला अदालत (Varanasi District Court) में चल रही है। कोर्ट फैसला लेगी कि ज्ञानवापी मस्जिद केस की सुनवाई होनी चाहिए या नहीं। इसके लिए 30 मई की तिथि मुकर्रर की है। अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी (Anjuman Intezamia Masjid Committee) ने मुस्लिम समुदाय से अपील की थी कि जुमे की नमाज (Juma Namaz) के लिए घर से ही वाजु करके आएं और सीमित संख्या में आएं। बावजूद इसके न केवल भारी भीड़ उमड़ी बल्कि कई लोग वाजु करके भी नहीं आए। ऐसे में इन लोगों को वाजु करके नमाज करने के लिए अलग व्यवस्था की गई है। उधर, जुमे की नमाज के लिए भारी पुलिस बल (Police Force) भी तैनात है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जुमे की नमाज के मद्देनजर जिला प्रशासन और पुलिस ने गुरुवार की रात से ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। गोदौलिया और मैदागिन से आने वाले रास्ते पर चार लेयर की बैरिकेडिंग की गई। जुमे की नमाज के लिए करीब 12 बजे से ही नमाजियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। भीड़ बढ़ने पर नमाजियों का प्रवेश रोक दिया गया। इससे पूर्व कई नमाजी ऐसे थे, जो कि वाजु करके नहीं आए थे। इन लोगों के लिए मस्जिद के बाहर एक घर में वाजु करने और नमाज अदा करने की व्यवस्था की गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया ताकि कहीं जाम की स्थिति न बन सके।

बता दें कि इस बार भी जुमे की भीड़ को संभालने के लिए पूर्व से ही अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से संदेश जारी कर मस्जिद में भीड़ न बढ़ाने की अपील की गई थी। इसके बावजूद भारी संख्या में नमाजी पहुंचे हैं। कोई भी उपद्रव न कर सके, इसके लिए भी गहन निगरानी रखी जा रही है। बताते चलें कि ज्ञानवापी मस्जिद केस की सुनवाई इलाहबाद हाईकोर्ट में चल रही है। बीते गुरुवार को मस्लिम पक्ष ने प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 का हवाला देकर अपनी दलीलें रखी थी कि इस केस की सुनवाई नहीं होनी चाहिए। हालांकि मुस्लिम पक्ष अपनी सभी दलीलें नहीं रख पाया। ऐसे में हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 30 मई की तिथि मुकर्रर की है।

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