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राजस्थान : गर्भवती की मौत को लेकर हिंसक हुआ प्रदर्शन, चौथे दिन भी परिजनों ने नहीं लिया शव

राजस्थान के चूरू जिले के हमीरवास थाना क्षेत्र के राजगढ़ तहसील के रामपुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में गर्भवती महिला की मौत को लेकर लोगों का प्रदर्शन हिंसक रूप लेता जा रहा है। गलत इंजेक्शन से महिला की मौत के मामले में ग्रामीणों की ओर से दिया जा रहा धरना सोमवार को भी जारी रहा।

गलत दवा का सेवन करने से नवविवाहित महिला की मौत
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महिला की मौत (प्रतीकात्मक फोटो)

राजस्थान के चूरू जिले के हमीरवास थाना क्षेत्र के राजगढ़ तहसील के रामपुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में गर्भवती महिला की मौत को लेकर लोगों का प्रदर्शन हिंसक रूप लेता जा रहा है। गलत इंजेक्शन से महिला की मौत के मामले में ग्रामीणों की ओर से दिया जा रहा धरना सोमवार को भी जारी रहा। धरना स्थल पर उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, भाजपा नेता रामसिंह कस्वा, बसपा नेता मनोज न्यांगली मौजूद रहे।

इधर ग्रामीणों के धरने को संबोधित करते हुए उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि जब तक ग्रामीणों की मांग नहीं मानी जाएगी। उनका धरना जारी रहेगा। उन्होंने ये भी कहा कि अब इसके लिए चाहे गोली चले या लाठी पीछे नहीं हटेंगे। इधर परिजनों ने चौथे दिन भी महिला का शव नहीं लिया है। ग्रामीणों की मांग है कि मृतका के परिजनों को दस लाख रुपए दिए जाएं। इसके अलावा यहां कार्यरत मेडिकल स्टाफ को निलंबित किया जाए और मृतका के परिजन को सरकारी नौकरी दी जाए। इस मामले में तहसील क्षेत्र से भी लोगों का आना शुरू हो गया है। भीड़ को देखते हुए मौके पर पुलिस जाब्ता तैनात है।

रविवार को प्रदर्शन के दौरान हुआ था पथराव, पांच पुलिसकर्मी हुए थे घायल

गर्भवती महिला की मौत को लेकर रविवार को लोगों ने प्रदर्शन किया और इस दौरान हुई पथराव की घटना में एक थानाधिकारी सहित पांच पुलिसकर्मी घायल हो गये। चूरू जिला पुलिस अधीक्षक पारिस देशमुख ने 'भाषा' को बताया कि रामपुरा पीएचसी में रविवार को कुछ महिलाओं और असामाजिक तत्वों ने जबरन घुसने कोशिश की। पुलिस दल ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो भीड़ ने पुलिस दल पर पथराव किया।

उन्होंने बताया कि भीड़ द्वारा किये गये पथराव में सादुलपुर थानाधिकारी सहित पांच-छह पुलिसकर्मी घायल हो गये और एम्बूलेंस और उपखंड अधिकारी के वाहन में तोड़फोड़ भी की गई है। अधीक्षक ने कहा कि पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और भीड़ को तितर-बितर करने के लिये आसूगैस के गोले छोडे़ गये। उसके बाद मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच फिर से वार्ता का दौर शुरू किया गया।

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