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कोटा में नाव हादसा: चम्बल नदी से दो और शव बरामद, मृतकों की संख्या 13 हुई, नावों के संचालन पर नहीं लग रही रोक

राजस्थान के कोटा में नाव हादसे में चम्बल नदी से दो और नाबालिग लड़कियों के शव बरामद होने के बाद इस दुर्घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 13 हो गई। पुलिस के अनुसार अब तक इस दु्र्घटना में छह पुरुष, चार महिलाएं और तीन नाबालिग लड़कियों की मौत हुई है।

कोटा में नाव हादसा: चम्बल नदी से दो और शव बरामद, मृतकों की संख्या 13 हुई, नावों के संचालन पर नहीं लग रही रोक
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चम्बल नदी में नाव हादसा

कोटा (राजस्थान)। राजस्थान के कोटा में नाव हादसे में चम्बल नदी से दो और नाबालिग लड़कियों के शव बरामद होने के बाद इस दुर्घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 13 हो गई। पुलिस के अनुसार अब तक इस दु्र्घटना में छह पुरुष, चार महिलाएं और तीन नाबालिग लड़कियों की मौत हुई है। राजस्थान के बूंदी जिले में स्थित एक मंदिर के लिए 30 से अधिक श्रद्धालुओं को ले जा रही एक नाव बुधवार सुबह चम्बल नदी में पलट गई थी। यह घटना खटोली पुलिस थाना क्षेत्र के गोत्र गांव में सुबह आठ बजकर 45 मिनट पर हुई। कोटा के जिला कलेक्टर उज्जवल राठौर ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह दो शव बरामद किए गए।

दुर्घटनाओं को रोकने के लिए नावों की एक सूची की गई तैयार

कोटा के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) शरद चौधरी ने बताया कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की ओर से चलाया जा रहा बचाव अभियान दो शवों के मिलने के बाद समाप्त हो गया। मृतकों की संख्या 13 हो गई है। अधीक्षक ने बताया कि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए नावों की एक सूची तैयार की गई है और अब जिसके पास सड़क यातायात विभाग से वैध लाइसेंस और फिटनेस सर्टिफिकेट होगा, उन्हीं को नाव चलाने की इजाजत मिलेगी। अधीक्षक ने कहा कि इन मापदंडों पर खरा नहीं उतरने वाली नावों को दो दिन के भीतर जब्त किया जाएगा। इसी बीच क्षेत्र के पुलिस अधीक्षक शुभाकर ने बताया कि 15 किलोमीटर तक गहन तलाश के बाच बचाव अभियान खत्म किया गया। हालांकि 10 सदस्यों वाली एसडीआरएफ की एक टीम को किसी भी संभावित बचाव कार्य के लिए घटनास्थल पर रुकने को कहा गया है। बृहस्पतिवार को मिले दो नाबालिग लड़कियों के शवों की पहचान 13 वर्षीय ज्योति और 15 वर्षीय अलका के रूप में हुई है। खटोली के थाना प्रभारी नारायण सिंह ने बताया कि पांच लोगों पर लापरवाही बरतने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। इस हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई जबकि 20 लोगों को बचाया गया।

हादसों के बाद भी प्रशासन नहीं दिखा रहा सख्ती

चम्बल नदी में नावों के डूबने जैसी घटनाओं के बाद भी जिला प्रशासन की ओर से नावों के संचालन पर रोक लगाने के लिए कोई भी प्रयास नहीं किए गए जा रहे है। हालांकि चंबल नदी का जल स्तर बढऩे के दौरान ही केवल नावों के संचालन को रोका जाता है, इसके बाद स्थिति पहले जैसी ही हो जाती है। गंभीर बात यह है कि जिले के घाटों से संचालित होने वाली अधिकांश नावें जर्जरावस्था में है। ऐसे में जिले के परिवहन विभाग की कार्य शैली पर सवाल सवाल खड़ा हो गया है कि वह नावों के स्थिति को देखकर भी मूक दर्शक क्यों बनी हुई है। अगर जल्द ही जिले के विभिन्न घाटों से संचालित हो रहे नावों के अवैध संचालन को नहीं रोका गया तो जिले में बड़ा हादसा होने की संभावना बनी हुई है।

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