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संजय दत्त की 'वास्तव' में राजस्थान के नामी गैंगस्टर आनंद पाल की कहानी, सुन खड़े हो जाएंगे रौंगटे

फिल्म 'वास्तव' की कहानी गैंगस्टर आनंद पाल सिंह के लाइफ की तरह है। गैंगस्टर आनंद पाल भी अपना सुनहरा भविष्य बनाना चाहता था, इसके लिए वो मेहनत में जुटा हुआ था, लेकिन वक्त से पहले और उम्मीद से ज्यादा पाने की चाहत ने उसका जीवन पलट दिया।

संजय दत्त की वास्तव में राजस्थान के नामी गैंगस्टर आनंद पाल की कहानी, सुन खड़े हो जाएंगे रौंगटे
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बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त की फिल्म 'वास्तव' तो आपने देखी होगी। ये फिल्म 1999 की सबसे बड़ी सुपरहिट मूवी थीं। फिल्म में संजय दत्त ने रघु का किरदार निभाया था। जो सीधा इंसान था, लेकिन वक्त उसे बदल देता है और वो गैंगस्टर बन जाता है। फिल्म की कहानी गैंगस्टर आनंद पाल सिंह के लाइफ की तरह है। गैंगस्टर आनंद पाल भी अपना सुनहरा भविष्य बनाना चाहता था, इसके लिए वो मेहनत में जुटा हुआ था, लेकिन वक्त से पहले और उम्मीद से ज्यादा पाने की चाहत ने उसका जीवन पलट दिया।

आनंदपाल टीचर बनना चाहता था, लेकिन सियासत भूत सवार होने के चलते उसने साल 2000 में जिला पंचायत का चुनाव लड़ा और जीता। इसके बाद उसे पंचायत समिति का प्रधान चुना गया। ये चुनाव उसने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर लड़ा था। चुनाव जीतने के बाद आनंद पाल ने शराब की तस्करी शुरू कर दी। धीरे-धीरे आनंदपाल राजस्थान का नामी गैंगस्टर बन गया। साल 2006 से उसने नागौर में जीवनराम गोदारा की हत्या कर दी। बताया जाता है कि वो जवान मदन सिंह राठौड़ की हत्या का बदला लेना चाहता था। ये हत्याकांड काफी सुर्खियों में रहा।


सुर्खियों तो आनंद पाल के एनकाउंटर ने भी खूब बटोरी। फिल्म 'वास्तव' में जिस तरह संजय दत्त की मां चाहती थी कि वो सरेंडर कर दे, उसी तरह आनंदपाल की मां का कहना भी था कि वो पुलिस के सामने सरेंडर कर दे। मां निर्मल कंवर ने आनंदपाल को आखिरी बार दूर से पति हुकुम सिंह के अंतिम संस्कार पर देखा था। एक दिन पुलिस को आनंदर पाल के एक घर में छिपे होने की खबर मिलीं। पुलिस ने रणनीति बनाई और उस घर को घेर लिया। पुलिस की मानें तो वो आनंद पाल का एनकाउंटर नहीं करना चाहते थे। लेकिन वो सरेंडर करने की बात पर बार-बार पुलिस टीम पर गोलियां दाग रहा था। इसके जवाब में ईआरटी कमांडो सोहन सिंह ने भी गोली चला दी, जिसका वो शिकार हो गया।

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