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सचिन पायलट से सुलह की कोशिशें कर रहा था हाई कमान, हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी चुनौती

राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कांग्रेस हाईकमान को चुनौती दे दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की बातों को दरकिनार कर सचिन पायलट सीधे हाई कोर्ट पहुंच गए हैं।

Rajasthan Crisis: सचिन पायलट खेमे के विश्वेंद्र सिंह सहित राजस्थान के कई विधायकों के खिलाफ नोटिस जारी, हॉर्स ट्रेडिंग का है मामला
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सचिन पायलट

हरिभूमि न्यूज। नई दिल्ली

बुधवार को देर शाम एआईसीसी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कांग्रेस से निष्कासित राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट से बातचीत कर रास्ता निकालने की कोशिश की थी और एक दिन बाद गुरुवार को पायलट ने विधानसभा स्पीकर के फैसले के खिलाफ जयपुर हाईकोर्ट में अपील दायर कर दी। इसे सीधे आलाकमान को चुनौती माना जा रहा है।

शीर्ष नेतृत्व जो कल तक पायलट को लेकर अपेक्षाकृत सकारात्मक था, उनकी वापसी की संभावनाएं बुन रहा था अब वे ही सभी रणनीतिकार ये मानकर चल रहे हैं कि सचिन पायलट अब कांग्रेस में वापस नहीं आएंगे। सो, गुरुवार को एआईसीसी का रंगरूप बदला। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वरा आहूत किए गए विधायक दल की बैठक में सचिन पायलट समेत 18 विधायक दो बार नहीं आए तो उन्हें पार्टी से निकालने के बाद उनकी विधायकी पर ही तलवार लटका दिया गया। तकनीकी रूप से पार्टी संविधान के जानकार इसे उपयुक्त कदम मान रहे हैं, मगर सचिन पायलट ने इस संबंध में विधानसभा स्पीकर द्वारा भेजे गए नोटिस को संज्ञान में लेकर हाईकोर्ट से गुहार लगाई है। उनका कहना है कि पार्टी की किसी विमर्श से सहमत नहीं होने पर एंटी-डिफेक्शन-लॉ लागू नहीं किया जा सकता। पार्टी के खिलाफ जाने का आरोप उन पर और उनके समर्थक विधायकों पर नहीं लगाया जा सकता।

बात यहीं पर नहीं रुकती। सचिन पायलट की हाईकोर्ट में पैरवी कौन कर रहे हैं - मुकुल रोहतगी और हरीश साल्वे। दोनों कानूनविदों को भाजपा का करीबी माना जाता है। तो फिर कयासों का बाजार गरम हुआ। क्या पायलट वाकई भाजपा के बिछाए गए बिसात के मोहरें हैं! भाजपा पायलट को परदे के पीछे से मदद कर रही है! कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता कहा, अब इसमें कुछ छिपा नहीं है। सचिन पायलट हरियाणा की भाजपा सरकार में मेहमान हैं। उनके विधायक हरियाणा के रिसॉर्ट में रुके हैं। हरियाणा सरकार उनकी सुरक्षा में लगाई गई है। और अब भाजपा की सभी कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए लगाए जाने वाले मुकुल रोहतगी और हरीश साल्वे को सचिन पायलट के लिए हाईकोर्ट में उतारा गया है इसका सीधा मतलब है राजस्थान कांग्रेस में छिड़ी रार के पीछे भाजपा का हाथ है! पायलट भाजपा के कहे अनुसार ही गोटियां चल रहे हैं। अब उनकी कांग्रेस वापसी की संभावना शून्य है। उक्त नेता ने कहा, इसका एक और मतलब ये है कि पायलट कोर्ट और इधर उधर कर कुछ समय निकालना चाहते हैं ताकि तब तक 30 की संख्या में विधायकों का जुगाड़ उनके पक्ष में हो सके। जो कि कतई संभव नहीं। राजस्थान सरकार की ओर से हाईकोर्ट में पैरवी करने अभिषेक मनु सिंघवी को उतारा गया है।

ऐसा है सियासी गणित

राजस्थान की 200 सदस्यों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए कम से कम 101 विधायकों की गिनती जरूरी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास अभी 109 विधायकों का समर्थन है। भाजपा के पास 73 विधायक हैं। 30 विधायक पायलट लाने में सफल रहे तो सरकार पलट सकती है। मगर, तब वहां से वसुंधरा राजे सिंधिया की राजनीति शुरू होगी। भाजपा के अंदर उन्हें विधानसभा चुनाव के बाद बर्फ खाने में लगाया हुआ है। मगर, माना जा रहा है कि 73 में से 42 विधायक वसुंधरा समर्थक हैं और खुद वसुंधरा के शीर्ष नेतृत्व से से बहुत अच्छे संबंध नहीं। इस बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता हनुमान बेनीवाल ने वसुंधरा पर ये आरोप लगाकर सनसनी मचा दी कि वो गहलोत सरकार बचाने पर काम कर रही हैं।


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