Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

rajasthan crisis : बैकफुट पर स्पीकर आए सीपी जोशी, सुप्रीम कोर्ट से वापिस ली याचिका

राजस्थान में जारी सियासी संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहां रोजाना कोई न कोई पेंच फंसता नजर आ रहा है। प्रदेश में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट और उनके गुट के विधायकों के बीच विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा हुआ है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई शुरू होते ही राज्य विधानसभा के स्पीकर सीपी जोशी ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली।

rajasthan crisis : बैकफुट पर स्पीकर आए सीपी जोशी, सुप्रीम कोर्ट से वापिस ली याचिका
X
सुप्रीम कोर्ट सीपी जोशी

नई दिल्ली-जयपुर। राजस्थान में जारी सियासी संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहां रोजाना कोई न कोई पेंच फंसता नजर आ रहा है। प्रदेश में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट और उनके गुट के विधायकों के बीच विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा हुआ है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई शुरू होते ही राज्य विधानसभा के स्पीकर सीपी जोशी ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली। स्पीकर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि वो याचिका वापस लेना चाहते हैं, क्योंकि हाईकोर्ट ने फैसला सुना दिया है और उनकी याचिका निष्प्रभावी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने शुक्रवार को 32 पेज का आदेश जारी किया है। इसे लेकर वे आगे की रणनीति तय करेंगे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी गई।

हाईकोर्ट के आदेश को दी थी चुनौती

गौरतलब है कि जोशी ने राजस्थान हाईकोर्ट के 21 जुलाई के आदेश को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने उनको 24 जुलाई तक बागी विधायकों के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगाने का आदेश दिया था। इससे पहले उनकी याचिका पर 23 जुलाई को सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने इस दौरान हाई कोर्ट को फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

हाईकोर्ट न कहा था यह कोई सामान्य मामला नहीं

23 जुलाई को सुनवाई के दौरान मामले में स्पीकर द्वारा बागी विधायकों को नोटिस भेजे जाने पर टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा था कि यह कोई सामान्य मामला नहीं है। ये विधायक भी चुने हुए प्रतिनिधि हैं। असहमति का स्वर लोकतंत्र में इस तरह नहीं दबाया जा सकता। अदालत देखेगी कि अयोग्य ठहराने की प्रक्रिया की इजाजत है कि नहीं। सुनवाई के दौरान स्पीकर की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने संविधान पीठ के किहोतो होलां फैसले का हवाला देते हुए कहा था कि दसवीं अनुसूची के तहत की गई स्पीकर की कार्यवाही में हाई कोर्ट को दखल देने का अधिकार नहीं है।

Next Story