Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

राजस्थान में टीकों की खराबी का मामला : रघु शर्मा ने फिर दोहराया- वैक्सीन खराब होने का प्रतिशत दो से भी कम

राजस्थान के चिकित्सा व स्वास्थ्य मंत्री डा. रघु शर्मा ने मंगलवार को एक बार फिर कहा कि राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण रोधी टीकों के खराब होने का प्रतिशत दो से भी कम है जो केंद्र द्वारा अनुमानित सीमा 10 प्रतिशत तथा टीके खराब होने के राष्ट्रीय औसत छह प्रतिशत से बेहद कम है।

राजस्थान में एक करोड़ से अधिक लोगों को लगी वैक्सीन की दोनों डोज, जानें कोरोना की तीसरी लहर को लेकर क्या है सरकार की तैयारी?
X

रघु शर्मा

जयपुर। राजस्थान में केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए टीकों की खराबी का मामला अभी थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। एक तरफ जहां इस मामले में भाजपा नेता प्रदेश सरकार पर जमकर आरोप लगा रहे हैं वहीं कांग्रेस के नेता इस पर सफाई देते नजर आ रहे हैं। अब राजस्थान के चिकित्सा व स्वास्थ्य मंत्री डा. रघु शर्मा ने मंगलवार को एक बार फिर कहा कि राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण रोधी टीकों के खराब होने का प्रतिशत दो से भी कम है जो केंद्र द्वारा अनुमानित सीमा 10 प्रतिशत तथा टीके खराब होने के राष्ट्रीय औसत छह प्रतिशत से बेहद कम है। राज्य में टीके खराब होने को लेकर जारी बहस के बीच शर्मा ने एक वीडियो संदेश में कहा कि राज्य में टीके के खराब होने की मात्रा दो प्रतिशत से कम है, जो केंद्र द्वारा अनुमानित सीमा 10 प्रतिशत तथा टीके खराब होने के राष्ट्रीय औसत छह प्रतिशत से बेहद कम है।

राज्य में अब तक 1 करोड़ 70 लाख लोगों का लगाया जा चुका है टीका

उन्होंने कहा कि राज्य में अब तक 1 करोड़ 70 लाख लोगों को टीका लगाकर राजस्थान देशभर में अग्रणी है। इसके साथ ही शर्मा ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन को भी इस बारे में पत्र लिखा है। इस पत्र को ट्विटर पर साझा करते हुए शर्मा ने लिखा कि राजस्थान में टीकाकरण के संबंध में कल एक दैनिक समाचार पत्र में छपी खबर के आधार पर आपने कल ही मुझे चिट्ठी लिखी और उसे ट्विटर पर डाला। ट्विटर के माध्यम से भेजे गए पत्र का मुझे भी मजबूरन ट्विटर के माध्यम से ही जवाब देना पड़ रहा है। अपने पत्र में उन्होंने उक्त खबर को भ्रामक, असत्य व तथ्यों से परे बताया है।

बोले- स्वास्थ्य कर्मचारियों पर डाला जा रहा दबाव

उन्होंने कहा कि इस खबर में जिन स्वास्थ्य केंद्रों का उल्लेख किया गया है वहां के टीकाकर्मियों व संबंधित चिकित्सा अधिकारियों द्वारा दिए गए बयानों से जो तथ्य सामने आए हैं उसके अनुसार इस खबर को बनाने वाले पत्रकारों ने स्वयं को गलत तरीके से स्वास्थ्य विभाग, राजस्थान का उच्चाधिकारी व डब्ल्यूएचओ का प्रतिनिधि बताया। इन लोगों ने संबंधित कर्मचारियों पर दबाव डालकर उनसे कुछ शीशियां लीं। शर्मा के अनुसार उक्त पत्रकारों ने निस्तारण के लिए संग्रहित की गई शीशियों में से कुछ शीशियां जबरदस्ती ले लीं। शर्मा के अनुसार कोई भी शीशी कचरे में फेंकी हुई नहीं थी।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा हर्षवर्धन ने एक कथित मीडिया रिपोर्ट के बाद राज्य में टीके खराब होने पर चिंता जताते हुए डा शर्मा को पत्र लिखा और इसे ट्विटर पर साझा किया था। राज्य में टीकों की उपलब्धता व इसके खराब होने को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस व मुख्य विपक्ष दल भाजपा में कई दिन से आरोप प्रत्यारोप चल रहा है।

Next Story