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राजस्थान में कोरोना अभी थमा नहीं बर्ड फ्लू बना चुनौती, जारी किया गया अलर्ट, ऐसे रखी जा रही नजर

राजस्थान में कोरोना वायरस का कहर अभी पूरी तरह से थमा नहीं था कि प्रदेश सरकार के सामने एक नई चुनौती आ खड़ी हुई है। प्रदेश में बर्ड फ्लू (Bird Flue) का खतरा मंडरा रहा है। जिसे लेकर सरकार सतर्क हो गई है।

बर्ड फ्लू बना चुनौती
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 बर्ड फ्लू

सीकर। राजस्थान में कोरोना वायरस का कहर अभी पूरी तरह से थमा नहीं था कि प्रदेश सरकार के सामने एक नई चुनौती आ खड़ी हुई है। प्रदेश में बर्ड फ्लू (Bird Flu) का खतरा मंडरा रहा है। जिसे लेकर सरकार सतर्क हो गई है। वहीं इस नहीं आफत को लेकर आम लोगों में चिंता बढ़ गई है। इससे बचने के लिए चिकित्सा विभाग ने तैयारियों को भी तेज कर दिया है। मामले में विभाग ने सभी जिलों को अलर्ट जारी कर दिया है। पशुपालन विभाग ने पोल्ट्री फार्म और पानी के स्थानों पर निगरानी रखना शुरू कर दिया है। विभाग ने जिला मुख्यालय सहित ब्लॉक स्तर पर रेपिड रेस्पांस टीम बनाई गई है। इन सभी टीम को अपने क्षेत्र में पक्षियों की होने वाली असामान्य मौत की स्थिति में फौरन जिला मुख्यालय को सूचना देनी होगी। जिससे जिला लैब की ओर से इन पक्षियों के सैम्पल लेकर जांच के लिए भिजवाया जा सके। गौरतलब है कि इस खतरनाक बीमारी से लड़ने के लिए शासन सचिव आरुषी मलिक ने प्रदेश के सभी जिला कलक्टर को जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय निकाय, वन विभाग सहित अन्य विभागों के बीच समन्वय बनाते हुए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं।

1997 में हॉन्गकॉन्ग में सामने आया था पहला मामला

जिला रोग निदान प्रयोगशाला के प्रभारी और जिला रेपिड रेस्पोंस टीम के डा वीरेन्द्र शर्मा ने बताया कि बर्ड फ्लू कई तरह के होते हैं। लेकिन इसमें एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस है जो इंसानों को संक्रमित करता है। इसका पहला मामला 1997 में हॉन्गकॉन्ग में आया था। उस समय बर्ड फ्लू के प्रकोप को पोल्ट्री फार्म में संक्रमित मुर्गियों से जोड़ा गया था। यह वायरस प्राकृतिक रूप से पक्षियों में होता है लेकिन ये पालतू मुर्गियों में आसानी से फैल जाता है। ये बीमारी संक्रमित पक्षी के मल, नाक के स्राव, मुंह के लार या आंखों से निकलने वाली पानी के संपर्क में आने से होता है। जो इंसानों के लिए भी घातक है।

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