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कोरोना की मार के बीच अब राजस्थान में बर्ड फ्लू का मंडराया खतरा, वन विभाग ने जारी किया हाई अलर्ट

राजस्थान में कोरोना वायरस का कहर कुछ कम हुआ था कि अब प्रदेश सरकार के सामने एक नई परेशानी खड़ी हो गई है। राज्य में अब बर्ड फ्लू (Bird Flue) का खतरा मंडरा रहा है। इस खतरनाक बीमारी की वजह से प्रदेश का वन विभाग सतर्क हो गया है और मुकुंदरा हिल्स सहित सभी प्रदेश के सभी वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, नेशनल पार्क और वन्यजीव क्षेत्रों में जारी किया हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

जारी किया हाई अलर्ट
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बर्ड फ्लू

जयपुर। राजस्थान में कोरोना वायरस का कहर कुछ कम हुआ था कि अब प्रदेश सरकार के सामने एक नई परेशानी खड़ी हो गई है। राज्य में अब बर्ड फ्लू (Bird Flu) का खतरा मंडरा रहा है। इस खतरनाक बीमारी की वजह से प्रदेश का वन विभाग सतर्क हो गया है और मुकुंदरा हिल्स सहित सभी प्रदेश के सभी वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, नेशनल पार्क और वन्यजीव क्षेत्रों में जारी किया हाई अलर्ट जारी कर दिया है। दरअसल मामला है झालावाड़ जिले का, जहां राड़ी के बालाजी क्षेत्र में मृत पाए गए तकरीबन 50 कौओं में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। क्षेत्र में लगातार हो रही कौओं की मौत के बाद प्रशासन ने इनके सैम्पल भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान भेजे थे। जहां से कौओं के सैम्पल में एवियन इंफ्लूएंजा रोग की पुष्टि हुई है।

झालावाड़ में कौओं में बर्ड फ्लू की पुष्टि

मामले की पुष्टि होते ही क्षेत्र में सीसीएफ झालावाड़ मनोज पाराशर ने वन मंडल, वन्यजीव और मुकुंदरा हिल्स में हाई अलर्ट जारी कर दिया। पाराशर ने बताया कि झालावाड़ में कौओं में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई हैं। डीसीएफ को आसपास के तालाब सहित अन्य एरिया में निगरानी रखने और एहतियात बरतने के निर्देश दिए हैं। बूंदी, बारां एरिया में भी डीसीएफ को सावधानी बरतने और चौकसी रखने के निर्देश दिए हैं। बूंदी, बारां और झालावाड़ के अलावा मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व एरिया में भी स्टाफ को अलर्ट कर दिया है। इसके साथ ही वन विभाग ने भी त्वरित हरकत में आते हुए प्रदेश के अन्य सभी वन्यजीव क्षेत्रों, वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, नेशनल पार्क में भी हाईअलर्ट घोषित कर दिया। विभाग ने सभी अधिकारियों और कार्मिकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं साथ ही हिदायत दी है कि किसी भी वन्यजीव या पक्षी में एवियन फ्लू के लक्षण दिखते हैं या किसी की मृत्यु होती है तो इसकी तत्काल मॉनिटरिंग की जाए। संदिग्ध पक्षी और वन्यजीव का इलाज के साथ उनके रक्त नमूने लेकर भोपाल स्थित इंस्टीट्यूट फॉर हायर सिक्योरिटी एनिमल डिजीज को भेजे जाएं। वहीं स्थानीय प्रशासन ने भी रेपिड रिस्पॉन्स टीम का गठन किया है।

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