Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

शिअद की केंद्र सरकार से अपील, किसानों की आशंकाएं दूर होने तक कृषि अध्यादेश लागू नहीं करें

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने भाजपा नीत केंद्र सरकार से अपील की कि किसानों द्वारा व्यक्त की गई आशंकाओं को दूर किए बिना वह तीन कृषि अध्यादेशों को मंजूरी के लिए संसद में पेश न करे।

शिअद की केंद्र सरकार से अपील : किसानों की आशंकाएं दूर होने तक कृषि अध्यादेश लागू नहीं करें
X
शिरोमणि अकाली दल

चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने भाजपा नीत केंद्र सरकार से अपील की कि किसानों द्वारा व्यक्त की गई आशंकाओं को दूर किए बिना वह तीन कृषि अध्यादेशों को मंजूरी के लिए संसद में पेश न करे। शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की अध्यक्षता में पार्टी कोर समिति की यहां हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। पार्टी द्वारा जारी बयान में कहा गया कि कोर समिति का मानना है कि यह उसकी जिम्मेदारी है कि 'अन्नदाता' की आशंकाओं को दूर करे और वह किसानों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को केंद्र सरकार के समक्ष रखने को प्रतिबद्ध है। पार्टी की ओर से यह बयान केंद्र द्वारा लागू तीन कृषि अध्यादेशों के विभिन्न किसानों संगठनों द्वारा बड़े पैमाने पर किए जा रहे विरोध के बाद आया है।

शिअद द्वारा कानून नहीं लागू करने की अपील पार्टी के पूर्व रुख से अलग है जिसमें उसने कहा था कि केंद्र ने उसे भरोसा दिया है कि इन अध्यादेशों का असर मौजूदा फसल खरीद नीति पर नहीं पड़ेगा। सुखबीर बादल ने पिछले महीने कहा था कि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने उन्हें पत्र लिखकर भरोसा दिया है कि राज्य की एजेंसियों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उत्पादों को खरीदने की मौजूदा नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बादल ने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह पर इस मुद्दे पर लोगों को भ्रमित कराने का आरोप लगाया था। किसानों ने आशंका जताई है कि इन अध्यादेशों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रणाली को खत्म करने का रास्ता साफ होगा और वे बड़े कॉरपोरेट घरानों की'दया' के भरोसे रह जाएंगे। वे इन अध्यादेशों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। शिअद कोर समिति ने रेखांकित किया कि पार्टी नेतृत्व ने गत कुछ दिनों में किसान संगठनों और खेत मजदूरों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की है। पार्टी ने विज्ञप्ति में कहा कि कृषि विशेषज्ञों से भी चर्चा की गई और उनकी राय ली गई। जमीनी पार्टी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ पार्टी नेताओं का रुख भी जाना गया। शिअद ने कहा कि सभी की राय जानने के बाद यह विचार बना कि केंद्र को शिअद द्वारा जताई गई आशंकाओं को दूर किए बिना कानून लागू करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।

Next Story