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कौन बनेगा मप्र का नया डीजीपी, सरकार ने शुरु की प्रक्रिया

आधिकारिक सूत्रों की पुष्टि है कि मप्र शासन गृह मंत्रालय ने मप्र कैडर के सीनियर आईपीएस अधिकारियों से डीजीपी बनने के संबंध में सहमति मांगी है। सीनियर आईपीएस अधिकारी, जो इस दौड़ में यानी वरिष्ठता क्रम में आ रहे हैं वे इस संबंध में कुछ भी कहना नहीं चाह रहे। क्योंकि मामला हाईलाइट होने पर बात बिगड़ जाती है। डीजीपी जौहरी की नियुक्ति के समय एक वरिष्ठ आईपीएस ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी थी कि वे पुलिस प्रमुख होते तो यह करते, वह करते, आदि-आदि। तब वह मामला विवादों में आया था। वे डीजीपी नहीं बन पाए।

कौन बनेगा मप्र का नया डीजीपी, सरकार ने शुरु की प्रक्रिया
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मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय भोपाल

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश के नए डीजीपी यानी पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। हालांकि नियुक्ति की यह प्रक्रिया अभी चार महीने तक चलनी है। क्योंकि वर्तमान डीजीपी विवेक जौहरी का कार्यकाल, जो दो साल का है, वह वर्ष 2022 में मार्च के महीने में पूरा हो जाएगा। जबकि इस अवधि से पहले सरकार को नए डीजीपी की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करनी है। सूत्र बताते हैं कि मप्र सरकार दिसंबर माह तक वरिष्ठता क्रम के मुताबिक भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों के नाम यूपीएससी को भेजेगी। फिर इस मामले में यूपीएससी की ओर से दिल्ली में प्रक्रिया पूरी होने के बाद मप्र सरकार को तीन नाम आएंगे। जिसमें से किसी एक की नियुक्ति मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे, आदेश जारी कर देंगे।

ये नाम हैं वरिष्ठता के क्रम में :

मप्र कैडर में आईपीएस अधिकारियों की प्रदेश में जो सूची है, उसमें सबसे ऊपर नाम आईपीएस जौहरी का है, जो वर्तमान में डीजीपी हैं। जबकि उनके बाद वरिष्ठता में नाम आईपीएस पुरुषोत्तम शर्मा का है, जो एक पारिवारिक विवाद में निलंबित चल रहे हैं। आईपीएस शर्मा के बाद आईपीएस सुधीर कुमार सक्सेना का नाम है, जो इस समय सीआईएसएफ नॉर्थ न्यू देहली में ज्वाइंट डायरेक्टर हैं। जबकि इनके बाद आईपीएस विजय यादव हैं, जो अक्टूबर महीने की आखिरी तारीख को सेवा निवृत्त होने वाले हैं। क्योंकि 19 अक्टूबर, यानी मंगलवार को वे 60 वर्ष के हो चुके हैं। आईपीएस यादव के बाद पवन कुमार जैन का नाम है, वर्तमान में डीजी होमगार्ड हैं। फिर आईपीएस अरुणा मोहन राव व आईपीएस शैलेष सिंह समेत क्रमश: आईपीएस राजेंद्र कुमार मिश्रा, आईपीएस अरविंद कुमार व आईपीएस आरके टंडन के नाम हैं। सूत्र बताते हैं कि इन नामों में से ही किसी एक का डीजीपी बनना संभव है।

वरिष्ठ आईपीएस कुछ बोलना नहीं चाहते :

इस समय के मुताबिक सीनियर्टी के आधार पर आईपीएस अधिकारियों में एक अधिकारी जो दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर हैं, उनका नाम सबसे आगे है, जबकि एक अधिकारी हाल ही में प्रदेश पुलिस की एक एजेंसी से स्थानांतरित कर दूसरी नई कमान संभाल चुके हैं, उनका नाम भी आगे है। इनमें से एक अधिकारी से हरिभूमि ने बात की तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में वे कुछ कहना नहीं चाहते। जहां तक प्रक्रिया का सवाल है तो वह अभी चार महीने चलनी है।

सीनियर आईपीएस अधिकारियों से मंत्रालय मांग रहा सहमति :

मप्र शासन गृह मंत्रालय सीनियर आईपीएस आॅफिसर्स को पत्र लिखकर डीजीपी बनने के संबंध में उनकी सहमति मांग रहा है। यह सहमति मिलने के बाद सीनियर्टी के मुताबिक नाम यूपीएससी को जाएंगे। इसी के आधार मप्र के अगले डीजीपी की नियुक्ति की जाएगी। एक सीनियर आईपीएस ने पुष्ट किया कि सरकार ने आईपीएस अधिकारियों से इस संबंध में सहमति मांगी है। वह नाम यूपीएससी को भेजे जाएंगे। वहां से तीन नाम का पैनल आएगा, जिसमें एक की डीजीपी पद पर नियुक्ति सीएम करेंगे।

कांग्रेस सरकार के समय बने थे जौहरी डीजीपी :

यहां बता दें कि वर्तमन डीजीपी विवेक जौहरी की नियुक्ति वर्ष 2020 में मार्च के महीने में हुई थी। तब कांग्रेस और भाजपा में से सरकार किसकी रहेगी, यह पूरी तरह साफ नहीं था। कवायद तेज थी, घटनाक्रम रोज बदल रहे थे। उस समय डीजीपी जौहरी को तत्कालीन कांग्रेस सरकार में इस पद पर नियुक्ति दी गई थी। उस समय वे देश की बीएसएफ के मुखिया के पद पर प्रतिनियुक्ति पर थे। फिर उन्हें डेपुटेशन से वापस मप्र में लाकर यह नियुक्ति दो साल के लिए दी गई।

बढ़ गया था डीजीपी जौहरी का कार्यकाल :

डीजीपी जौहरी को वर्ष 2020 में सितंबर महीने में सेवा निवृत्त होना था, लेकिन डीजीपी पद पर दो साल के लिए नियुक्ति होने के कारण वे वर्ष 2020 में मार्च के महीने में सेवा निवृत्त होंगे।

कांग्रेस के समय की नियुक्ति भाजपा के समय भी कायम :

यहां बता दें कि प्रदेश के प्रशासनिक प्रमुख यानी चीफ सेक्रेटरी व पुलिस प्रमुख यानी डीजीपी की नियुक्ति सरकारें अपने माफिक रखती हैं। जबकि डीजीपी जौहरी की नियुक्ति कांग्रेस शासन के समय प्रदेश में होने के बाद भाजपा ने उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए अपने शासन काल में भी डीजीपी रखा है। अब देखना है कि सरकार किन आईपीएस अधिकारी को इस पद पर काबिज करती है।

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