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उज्जैन ज़हरीली शराब कांड : निगमकर्मी गब्बर और सिकन्दर पर शिकंजा, कई आरोपी गिरफ्तार

उज्जैन में जहरीली शराब के कारण हुई 14 लोगों की मौत के मामले गिरफ्तार आरोपी बता रहे हैं, कैसी हुई यह घटना। पढ़िए पूरी खबर-

उज्जैन ज़हरीली शराब कांड : निगमकर्मी गब्बर और सिकन्दर पर शिकंजा, कई आरोपी गिरफ्तार
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उज्जैन। उज्जैन में हुए जहरीली शराब काण्ड के मुख्य आरोपी गब्बर और सिकंदर उज्जैन नगर निगम में अस्थाई कर्मचारी के तौर पर काम करते थे। वही यूनुस चिंगारी सिकंदर और गब्बर का अवैध कारोबार सम्हालता था। दूसरी ओर महाकाल थाना पुलिस ने कहारवाड़ी में झिंझर बेचने वाले शंकर और बेबी सहित अन्य लोगों को हिरासत में लिया है, जो पिछले कई सालों से झिंझर बेच रहे थे।

इस घटना से कई मजदूरों की जान लेने के आरोपी गब्बर और सिकंदर सहित यूनुस उज्जैन के नगर निगम में अस्थाई कर्मचारी के तौर पर काम कार्यरत थे। जहां सभी आरोपी पार्किंग की आड़ में शराब बनाकर बेचते थे।

आरोपियों ने मामूली बेल्ट की दुकान चलाने वाले सुनील उर्फ भूरा को ठेला दिलाया था और रुपयों के लालच में अवैध शराब झिंझर बनाकर बेचना शुरू कर दिया।

निगम के पुराने भवन में एक माह पूर्व ही पार्किंग का ठेका सुनील उर्फ भूरा को दिया गया। जो मामूली बेल्ट की दुकान चलाता है और हीरा मिल की चाल का निवासी है। लाखों रुपए का ठेका वह कैसे ले सकता है? पुलिस ने आशंका जताई है कि इस ठेके में भी पैसा सिकंदर का लगा है। ठेकेदार सुनील के घर जाकर भी वस्तुस्थिति पता की गई है। इस संदर्भ में ननि को पत्र लिखकर जानकारी लेने की बात कही गई है। कितने सालों से सिकंदर और गब्बर नौकरी कर रहे हैं और उन्हें क्या दायित्व दिया गया था, इसका भी पता किया जाएगा, क्योंकि छत्री चौक क्षेत्र में ही उसकी ड्यूटी बाजार व्यवस्था की बताई गई है। यह भी पता कर रहे हैं कि जब वह अस्थाई कर्मचारी है तो उसे बाजार की व्यवस्था जैसा महत्वपूर्ण दायित्व और वायरलैस कैसे दिया गया.?

बताया जाता है कि सिकंदर करीब तीन-चार साल पहले ही अस्थाई कर्मचारी के तौर पर काम पर लगा था। वह अतिक्रमण गैंग में है और वर्तमान में गोपाल मंदिर, छत्री चौक के ठेलों को व्यवस्थित करने का काम देखता था।

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