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द रीयल बर्निंग ट्रेन... चंबल के बीहड़ में दौड़ी जलती हुई ट्रेन

- दिल्ली से चलकर छत्तीसगढ़ के दुर्ग के लिए जा रही थी ट्रेन। आग ए-2 कोच के टॉयलेट में बिजली का शार्ट सर्किट होने से लगी। जिसकी जानकारी ट्रेन के ड्राइवर को देर में हो पाई, लेकिन धुंआ बोगी में भरते ही यात्रियों भगदड़ मच गई। आग ने ए-1 कोच को भी अपनी चपेट में ले लिया। हेतमपुर स्टेशन पर ट्रेन को रोका गया, तब ग्रामीणों ने ट्रेन से अलग किए दोनों एसी कोच।

द रीयल बर्निंग ट्रेन... चंबल के बीहड़ में दौड़ी जलती हुई ट्रेन
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विनोद त्रिपाठी . भोपाल

द बर्निंग ट्रेन एक सुपरहिट फिल्म थी, लेकिन शुक्रवार को चंबल के बीहड़ में लोगों ने दिल्ली-मुंबई रूट की रेल लाइन पर द रीयल बर्निंग ट्रेन देखी। ट्रेन दौड़ रही थी, जिसके दो एयर कंडीशनर कोच ए-1 व ए-2 से आग की लपटें बहुत तेज निकल रही थीं। यात्रियों की मानें तो ट्रेन 10 मिनट से अधिक समय तक द बर्निंग ट्रेन बनकर दौड़ी। हम बात कर रहे हैं दिल्ली से चलकर छत्तीसगढ़ के दुर्ग के लिए जा रही ऊधमपुर-दुर्ग एक्सप्रेस ट्रेन की जिसके दो एयर कंडीशनर कोच शुक्रवार को चलती ट्रेन में आग से पूरी तरह जल गए। यह आग ए-2 कोच के टॉयलेट में बिजली का शार्ट सर्किट होने से लगी। जिसकी जानकारी ट्रेन के ड्राइवर को देर में हो पाई, लेकिन धुंआ बोगी में भरते ही यात्रियों भगदड़ मच गई। इन एसी कोचों में 85 यात्री सवार थे। जो जान बचाकर दूसरे कोचों में भागे। ट्रेन के स्टाफ ने जैसे-तैसे ड्राइवर तक सूचना पहुंचाई। तब तक आग ने ए-1 कोच को भी अपनी चपेट में ले लिया। गनीमत रही कि सभी यात्री सुरक्षित बच गए, लेकिन कुछ यात्री घायल हुए हैं, ट्रेन जब हेतमपुर पर रोकी जा रही थी, तो कुछ यात्री चलती ट्रेन से ही कूदे। क्योंकि बोगियों में धुआं भर रहा था। वे जान बचाकर दूसरी बोगियों में पहुंचे। इधर उनका समूचा सामान जलकर राख हो गया। मुरैना जिले के हेतमपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन को रोककर आग बुझाई गई। जिसमें 20 दमकल गाड़ियां लगाई गर्इं। शाम 6 बजे आगरा से डीजल इंजन मंगाकर ट्रेन को ग्वालियर के लिए रवाना किया गया।

सूत्रों के मुताबिक दिल्ली से ट्रेन नंबर 20848 दुर्ग के लिए रवाना हुई थी। शुक्रवार की दोपहर 2.10 बजे यह ट्रेन उत्तरप्रदेश के आगरा आ गई थी। यहां से चलकर ट्रेन 3.01 बजे राजस्थान के धौलपुर रेलवे स्टेशन पर आई थी। धौलपुर से ट्रेन ने ज्यों ही मध्यप्रदेश की सीमा में प्रवेश किया, इसके कोच ए-2 के बाथरूम में बिजली के शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। आग ने थोड़ी ही देर में विकराल रूप धारण कर लिया। बोगी में धुंआ भरा, यात्री दूसरे कोचों में निकल गए, लेकिन जलती हुई ट्रेन चंबल के बीहड़ों के बीच दौड़ती रही। यह कुछ किलोमीटर तक जलती हुई ही चली। जब ड्राइवर को इसकी सूचना मिली तो उसने ट्रेन को हेतमपुर स्टेशन पर रोक दिया। हालांकि यहां ट्रेन का स्टॉपेज नहीं था, लेकिन इमरजेंसी में ट्रेन को यहां लूप लाइन पर लेकर आग बुझाने का काम शुरु हुआ। जलती ट्रेन लोगों ने देखी तो कुछ ही देर में हेतमपुर व आसपास के गांवों से ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। तब तक मुरैना व धौलपुर से दमकल गाड़ियां भी हेतमपुर आ गर्इं। फिर आग बुझाने का काम तेजी से चला।

ग्रामीणों ने दिखाई हिम्मत :

एसी कोचों को ट्रेन से अलग करने में ग्रामीणों ने बहुत हिम्मत दिखाई। एसी कोच ट्रेन के पीछे के हिस्से में थे, जिन्हें मुख्य ट्रेन से अलग कर दिया, तब ड्राइवर ने बाकी पूरी ट्रेन आगे बढ़कर खड़ी कर दी। जबकि दोनों एसी कोच ए-1 व ए-2 के पीछे एच-1 व अंत में जनरेटर वाला कोच था, जिसे ग्रामीणों ने पहले ही अलग कर दिया था। इस तरह से जलती बोगियों को बीच में खड़ा करके आग बुझाने का काम जोेरों पर चला।

20 दमकल गाड़ियां आग बुझाने में लगीं :

मौके पर मुरैना, आगरा, धौलपुर, बानमोर व कैलारस तक की दमकल गाड़ियां आग बुझाने में लगाई गर्इं। 20 दमकल गाड़ियों ने ट्रेन की दोनों बोगियों की आग बुझा दी। तब तक आगरा से डीजल इंजन भी हेतमपुर पहुंच गया। इसके बाद ट्रेन को ग्वालियर रवाना किया गया। ट्रेन के ग्वालियर पहुंचने पर भी यात्री दहशत में थे। कुछ यात्रियों ने कहा कि जब बोगियों में धुंआ भरा तो लगा कि अब बचना मुश्किल है।

यह भी जानिये खास :

- द रीयल बनिंग ट्रेन लोगों ने जब देखी तो उसके वीडियो रिकॉर्ड कर लिए।

- मुरैना एसपी ललित शाक्यवार मौके पर पहुंचे। उन्होंने हादसे की जानकारी ली।

- इस एक्सप्रेस ट्रेन में आग का मंजर क्या रहा होगा जो दोनों कोच पूरी तरह बर्बाद हो गए।

- आग ने एसी कोचों के कांचों को पिघला दिया, लपटें टूटी खिड़कियों से आसमान छूने की कोशिश कर रही थीं।

- मुरैना के फायर फाइटर रामजीवन ने मौके पर मीडिय से कहा कि ग्रामीणों ने आग बुझाने में बहुत मदद की।

- चंबल के बीहड़ों से जब द बर्निंग ट्रेन दौड़ती गुजरी तो चरवाहे भी ट्रेन की ओर दौड़ने लगे थे, कई हेतमपुर तक आए।

- कुछ यात्रियों ने कह कि बच्चों को बचाने ट्रेन के रुकते ही उन्हें इमरजेंसी खिड़कियों से बाहर फेंककर उनकी जान बचाई, फिर खुद कूदे।

- मुरैना की सीमा में इस ट्रेन रूट पर कुछ वर्ष पहले भी एक ट्रेन में आग लगी थी, लेकिन वह हादसा इस बार की तरह दिल दहलाने वाला नहीं था।

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