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आत्मनिर्भर MP : रोडमैप पर काम शुरू, 16 सदस्यीय कोर कमेटी करेगी तय

कोर कमेटी में एसीएस आईसीपी केशरी को बनाया गया टीम लीडर। पढ़िए पूरी खबर-

आत्मनिर्भर MP : रोडमैप पर काम शुरू, 16 सदस्यीय कोर कमेटी करेगी तय
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भोपाल। आत्मनिर्भर भारत की तर्ज पर मप्र में आत्मनिर्भर मप्र के लिए रोडमैप बनना शुरू हो गया है। यह रोडमैप तीन सालों के लिए होगा। इस अवधि में लघु, मध्यम व सूक्ष्म (एमएसएमई) उद्योगों को नए सिरे से विकसित किया जाएगा, ताकि हर व्यक्ति को रोजगार से जोड़ा जा सके। सरकार ने अभी 16 सदस्यीय कोर कमेटी बनाई है। इस कोर कमेटी में एसीएस आईसीपी केशरी को टीम लीडर बनाया गया है। 6 प्रमुख सचिव व 9 अन्य आईएएस अफसर कमेटी के सदस्य हैं।

आत्मनिर्भर मप्र में 3 वर्षो का पूरा खाका होगा। इसमें प्रत्येक सेक्टर पर फोकस किया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि इस कार्य में जो भी हितधारक हैं, उन सभी के विचार व सुझाव आमंत्रित किए जाए। इन्हीं सुझावों व विचारों के आधार पर संबंधित सेक्टर के लिए रोडमैप बनेगा। इसके बाद इस पर कि्रयान्वयन शुरू होगा। इस टीम में अटल विहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के प्रमुख सलाहकार राहुल चौधरी को समन्वयक के रूप में नामांकित किया गया है। इस समिति की पहली बैठक पिछले महीने 27 जुलाई को हुई थी। इसके बाद 30 जुलाई को वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए हुई। इस दौरान विशेषज्ञों ने अपना प्रजेंटेशन भी दिया। कमेटी में प्रमुख सचिव मलय श्रीवास्तव, अशोक बर्णवाल, नीरज मंडलोई, संजय दुबे, शिवशेखर शुक्ला, नीतेश व्यास को सदस्य बनाया गया है। इसके साथ ही कमेटी में आईएएस अफसर आकाश त्रिपोठी, िनकुंज श्रीवास्तव, श्रीमन शुक्ला, तेजस्वी एस. नायक, किरण गोपाल, सोनिया मीना, सचिव एनवीडीए सीएस पवार, पीडब्ल्यूसी राहुल रायजादा व ई एंड वाय अपूर्वा सिंह को सदस्य नामित किया गया है। यह सभी टीम लीडर के नेतृत्व में काम करेंगे। 

इनसे लिए जाएंगे सुझाव व विचार

इसके लिए विभिन्न हितधारकों जैसे जनप्रतिनिधि, प्राइवेट सेक्टर के शिक्षाविदों एवं विषय विशेषज्ञों के विचार व सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। इनसे प्राप्त सुझावों व विचारों के आधार पर कोर कमेटी के सदस्य संबंधित सेक्टर के लिए 3 वर्ष का रोड मैप तैयार करेंगे। इस पर तेजी से काम शुरू किया गया है। आने वाले दिनों में जल्दी ही रोड मैप तैयार हो जाएगा। इसके बाद इसका कि्रयान्वयन शुरू होगा। 

आत्मनिर्भर मप्र के लिए इस पर भी होगा फोकस

आत्मनिर्भर मप्र बनाने के लिए मप्र में उद्योग और खनिज को अधिक से अधिक बढ़ावा दिया जाएगा। उद्योगों को आकर्षित करने व निवेश के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बहुत आवश्यक है। सरकार का मानना है कि मप्र में रियल इज ऑफ डूइंग बिजनेस होना चाहिए। ताकि निवेशक यहां बिना किसी परेशानी के अपने उद्योग स्थापित कर सकें, सरकार उन्हें पूरा सहयोग देगी। आत्मनिर्भर भारत पैकेज में चूंकि कामर्शियल माइनिंग का प्रावधान किया गया है। यह उद्योग एवं व्यवसाय के लिए अत्यंत उपयोगी होगा। मप्र सरकार का मानना है कि मप्र में कोयले के साथ ही बॉक्साइट प्रचुर मात्रा में है। कोयला खदानों के साथ बॉक्साइट की संयुक्त नीलामी से उद्योगों को बढ़ावा देने में अत्यंत सहायक होगी। इसलिए खनिज संपदा के दोहन में कोई कसर नहीं छोड़ने का निर्णय लिया गया है।

मध्यप्रदेश की 11 कोयला खदाने भी होंगी शामिल

कोयला क्षेत्र में सुधार की नीति के तहत केंद्र सरकार ने अब कमर्शियल माइनिंग का प्रावधान किया है। इससे अब कोई भी पार्टी कोल ब्लॉक के लिए बोली लगा सकेगी। कोयला खुले मार्केट में विक्रय किया जा सकेगा। प्रतियोगिता बढ़ने से बंद पड़ी खदानें चालू होंगी, नई खदानें शुरू होंगी। कोयले के दाम कम होने से पावर, एलुमिनियम एवं स्टील सेक्टर को लाभ होगा। केंद्र सरकार से हाल ही में जारी की गई कोल खदानों की नीलामी सूचना में देश की 41 कोयला खदानों में से मप्र की कुल 11 कोयला खदानें सम्मिलित की गई है। इसकी ड्यू डेट 18 अगस्त रखी गई है।

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