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कचरा सेग्रीगेशन और गंदे पानी से हरे हुए गार्डन ने भोपाल को दिलाया पहला तमगा

जिले की 222 पंचायतों के 466 गांवों में सौ फीसदी लोगों के घरों के टॉयलेट का उपयोग करने, घरों से कचरा वाहनों की मदद से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग उठाकर उसका सेग्रीगेशन करने और किचन और बाथरूम के पानी से किचन गार्डन और पेड़ों में पानी दिया गया, इसके साथ टॉयलेट से निकलने वाले गंदे पानी को सोखता गड्डे की मदद से निपटान किया गया।

स्वच्छता की रैकिंग में भोपाल के गांवों को मिला पहला स्थान

गांव में सौ फीसदी लोगों ने किया टॉयलेट का उपयोग

भोपाल। जिले की 222 पंचायतों के 466 गांवों में सौ फीसदी लोगों के घरों के टॉयलेट का उपयोग करने, घरों से कचरा वाहनों की मदद से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग उठाकर उसका सेग्रीगेशन करने और किचन और बाथरूम के पानी से किचन गार्डन और पेड़ों में पानी दिया गया, इसके साथ टॉयलेट से निकलने वाले गंदे पानी को सोखता गड्डे की मदद से निपटान किया गया। इन्हीं तीन वजहों से भोपाल को वेस्ट जोन में पहला स्थान मिला है। सूबे की श्रेणी में मध्यप्रदेश भी टॉप पर है। जिले को पहला स्थान मिलने पर कलेक्टर अविनाश लवानिया ने ग्रामीणों का आभार जताया है।

स्वच्छता अभियान के तहत सूखा कचरा, गीला कचरा और गांव से निकलने वाले गंदा पानी के निपटान को लेकर गांवों में अच्छा काम किया गया ह। जिसके तहत किचन और बाथरूम से निकलने वाले पानी को टॉयलेट फ्लश और पौधों के लिए उपयोग किया गया, जबकि टॉयलेट से निकलने वाले पानी को सोखता गड्डा बनाकर निबटान किया गया है। वर्तमान में जिले के 466 गांवों में से 300 गांव ओडीएफ प्लस हैं। इन गांवों में ई-रिक्शा से कचरा कलेक्शन किया जा रहा है। कचरा कलेक्शन का काम महिलाओं के स्व-सहायता समूहों कर रहे है। कचरे की छटाई का काम ईटखेड़ी में किया जा रहा है। सभी कचरा गाड़ियों में जीपीएस सिस्टम लगा हुआ है।

- ग्रेवॉटर के लिए बनाई नालियां

ग्र्रेवाटर के निबटान के लिए सोकपिट, नाडेप, पाईप लाईन और नालियां बनाई गई हैं। जिसकी मदद से गंदे पानी का उपयोग किया गया है। इसके साथ डीईडब्ल्यूएटीएस और डब्ल्यूएसपी बनाकर पानी का सदुपयोग किया गया।

- गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान को पछाड़ा

जल शक्ति मंत्रालय ने पूरे देश में स्वच्छ भारत ग्रामीण अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में प्रदेशों को 4 जोन ईस्ट, वेस्ट, नार्थ और साउथ में बांटा गया है। मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान राज्यों के जिलों को वेस्ट जोन में शामिल किया गया है।

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