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MP में मौत का बायपास, अक्सर मरते हैं काले मवेशी...महीने में 17 लोगों की मौत, एक दर्जन विकलांग

मध्यप्रदेश (Madhyapradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) को जोड़ने वाला एक बायपास (Bypass) ऐसा भी है, जिसके बारे में अब लोगों की धारणा बनने लगी है कि उस पर गुजरना मौत से खेलने के बराबर है। पढ़िए पूरी खबर-

MP में मौत का बायपास, अक्सर मरते हैं काले मवेशी...महीने में 17 लोगों की मौत, एक दर्जन विकलांग
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प्रकाश भोमरकर, भोपाल। भोपाल से रायसेन (Bhopal to raisen) की ओर जाने वाला रायसेन बायपास मौत का बायपास बन गया है। वर्ष 2021 में शुरुआती महीने में यहां सड़क हादसे में 17 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि 44 लोग गंभीर रूप से घायल हुए है। इनमें कुछ का इलाज चल रहा है। इसी प्रकार 19 लोगों को मामूली चोटें हैं। हादसे में दर्जनभर लोग हादसे के बाद अपने हाथ पैर या शरीर का कोई हिस्सा गंवाकर दिव्यांग (Divyang) हो चुके हैं। दरअसल, सड़क (Road) तो यहां की अच्छी बन गई है, लेकिन रोड पर कुछ मानकताओं (Standard) पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सरपट सड़क पर स्पीड ब्रेकर (Speed Breaker) नहीं होना भी हादसे (Accident) का एक बड़ा कारण है। भोपाल से रायसेन तक जाने वाला यह बायपास कहीं, 60 फीट तो कहीं 40 फीट तो कहीं सिर्फ 30 फीट ही रह गया है। इस स्थिति में उसे टू लेन (Two Lane) करना मुश्किल है। टू लेन नहीं होने और डिवाइडर (Divider) नहीं होने से ओवरटेक (Overtake) करने पर अक्सर यहां वाहन चालक को हादसे का शिकार होना पड़ता है।

बायपास पर अधिकतर हादसे बिलखिरिया थाना क्षेत्र में हो रहे हैं। यह क्षेत्र नगर निगम की सीमा में नहीं आता है। सड़क नई बनने के कारण पूरी जिम्मेदारी मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) के पास है। निगम टोल टैक्स (Tax)तो वसूल कर रहा है, लेकिन उसके अनुसार सुविधाएं मुहैया नहीं करा पा रहा है। यहां करोड़ों की लाइटें बंद पड़ी है। बारिश (Rain) में मवेशी (Animals) सड़क पर बैठ जाते हैं। अक्सर मवेशियों के झुंड पर वाहन चालकों (Drivers) की नजर नहीं पड़ती और हादसा हो जाता है। अक्सर मवेशियों के हादसों में मरने के बाद पुलिस (Police) के सामने समस्या यह हो जाती है कि नगर निगम को कॉल करने पर सीधे जवाब मिल जाता है कि वह उनकी सीमा में नहीं आता है। वहीं पंचायत में भी कोई जिम्मेदार मवेशियों को सड़क से हटाने जहमत नहीं उठाता। टोल प्लाजा पर जानकारी दी जाती है और टोल प्लाजा के कर्मचारी मवेशियों को क्रेन पर लटकाकर ले जाते हैं। इस स्थिति में हिंदू संगठन (Hindu Organization) की नजरों से बचना पड़ता है। लिहाजा रात में ही टोल प्लाजा के कर्मचारी हादसों के बाद मवेशियों को ले जाकर दफन कर देते हैं।

सड़क हादसों में सर्वाधिक काले रंग के मवेशी मरते हैं। दरअसल, लाइटें बंद होने के कारण अचानक सड़क पर बैठे गहरे रंग (Dark Color) के मवेशी वाहन चालकों को नजर नहीं आते। जब तक नजर पड़ती है देरी हो जाती है। इधर, करोड़ों की बंद पड़ी लाइट (Lights) को शुरू करने के लिए पुलिस कई बार टोल प्लाजा से पत्राचार कर चुकी है। वहीं टोल प्लाजा भी लाइटें शुरू करने के लिए विद्युत मंडल (MPEB) से पत्राचार कर चुकी है, लेकिन बंद लाइटों को शुरू नहीं किया गया। इसका खामियाजा बायपास से गुजर रहे वाहन चालकों को और मवेशियों को भुगतना पड़ रहा है।

यहां अक्सर होते हैं हादसे

छावनी पठार, बिलखिरिया गांव, कंकाली, खजूरी कला बायपास से एलएनसिटी कॉलेज ( LN City College) और कोलुआ गांव की तरफ जाने वाली सड़क, हादसों के लिए ब्लैक स्पॉट ( Black Spot) है। यहां गांव से आकर मुख्य सड़क पर मिलने वाली सड़क के कारण अक्सर हादसे होते हैं। गांव की सीमा शुरू होने के कारण ग्रामीण (Villagers)सड़क पर आते हैं और तेज रफ्तार वाहनों ( High Speed Vehicles) से अक्सर हादसे का शिकार हो जाते हैं। जिम्मेदारों का कहना है कि बायपास पर ब्रेकर बनाना गाइड लाइन में शामिल नहीं है।

मवेशियों को हटाना हमारा काम नहीं, पर कर देते हैं : डीजीएम

मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के डीजीएम आरके गुप्ता कहते हैं कि हमारी पेट्रोलिंग पार्टी इलाके में घूमती है। मवेशियों को रास्ते से हटाना हमारा काम नहीं, फिर भी लोगों की सुरक्षा को देखते हुए मवेशियों को पेट्रोलिंग टीम हटाती है। सड़क पर लाइटों के लिए विद्युत मंडल से चर्चा की गई है। साथ ही पत्राचार (Correspondence) भी हुआ है, लेकिन उनका कुछ टेक्निकल इश्यू (technical issue) है। इस कारण लाइटें शुरू नहीं हो सकी है।

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