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रोजा अफ्तार के पहले जेल में कदियों ने लिया नेक राह पर चलने का संकल्प

सेंट्रल जेल में बुधवार को खुद्दाम ए मिल्लत ने रोजा अफ्तार कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें एक साथ बैठकर हिंदू-मुस्लिम कैदियों ने एक साथ रोजा खोला। कार्यक्रम के पहले मौलाना मुफ्ती उमर लिबिया ने बंदियों से मुखातिब होते हुए तकरीर की। जिसमें उन्होंने बताया कि माफी के दरवाजे हमेशा खुले रहते है।

रोजा अफ्तार के पहले जेल में कदियों ने लिया नेक राह पर चलने का संकल्प
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सेंट्रल जेल में खुद्दाम ए मिल्लत ने कराया 10वां रोजा इफ्तार

गुनाहों की माफी के दरवाजे नहीं होते बंद

भोपाल। सेंट्रल जेल में बुधवार को खुद्दाम ए मिल्लत ने रोजा अफ्तार कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें एक साथ बैठकर हिंदू-मुस्लिम कैदियों ने एक साथ रोजा खोला। कार्यक्रम के पहले मौलाना मुफ्ती उमर लिबिया ने बंदियों से मुखातिब होते हुए तकरीर की। जिसमें उन्होंने बताया कि माफी के दरवाजे हसेंट्रल जेल में बुधवार को खुद्दाम ए मिल्लत ने रोजा अफ्तार कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें एक साथ बैठकर हिंदू-मुस्लिम कैदियों ने एक साथ रोजा खोला। कार्यक्रम के पहले मौलाना मुफ्ती उमर लिबिया ने बंदियों से मुखातिब होते हुए तकरीर की। जिसमें उन्होंने बताया कि माफी के दरवाजे हमेशा खुले रहते है।मेशा खुले रहते है। ऐसे में जरूरत है कि अपनी पिछली जिंदगी के गुनाहों की तौबा कर नेक राह पर चला जाएगा। इस दौरान सभी कैदियों ने एक साथ नेक राह पर चलने का संकल्प लिया।

खुद्दाम ए मिल्ल्त के संयोजक मुफ्ती सय्यद दानिश परवेज नदवी ने बताया कि कोई इंसान अगर गुनाह करता है और उस पर शमिंर्दा होकर अपने जीवन में सुधार लाता है तो उसके लिए माफी के दरवाजे खुल जाते है। कार्यक्रम की शुरूआत तिलावत-ए-कुरान से हाफिज सय्यद शाहवेज नदवी ने की। इस मौके पर सेंट्रल जेल के अधीक्षक दिनेश नरगावे सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन हाफिज अब्दुर्रहमान नदवी ने किया। कार्यक्रम के अंत में दुआ मांगी गईं।

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