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अत्याधुनिक तकनीक से लेस होगी अटल टनल, पढ़ें इसकी खासियतें

सामरिक महत्व की 8.8 किलोमीटर लंबी अटल (रोहतांग) टनल का कार्य अंतिम चरण में है। मनाली से लेह को जोड़ने वाली रोहतांग दर्रे और उसकी चोटियों के नीचे से बनी टनल अपने आप में सबसे अलग है। टनल विश्व की आधुनिक तकनीक से बन रही है।

अत्याधुनिक तकनीक से लेस होगी अटल टनल, पढ़ें इसकी खासियतें
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फाइल फोटो

सामरिक महत्व की 8.8 किलोमीटर लंबी अटल (रोहतांग) टनल का कार्य अंतिम चरण में है। मनाली से लेह को जोड़ने वाली रोहतांग दर्रे और उसकी चोटियों के नीचे से बनी टनल अपने आप में सबसे अलग है। टनल विश्व की आधुनिक तकनीक से बन रही है। टनल के प्रवेश द्वार पर सेंसर से गाड़ियों का तापमान चेक होगा। उसके बाद ही गाड़ियां अंदर हो पाएंगी। अत्याधुनिक तकनीक से बन रही अटल टनल के दोनों प्रवेश द्वारों पर हॉट-स्पॉट डिटेक्शन सिस्टम होंगे। इसके सेंसर टनल में प्रवेश करने वाले वाहनों के इंजन का तापमान, टायर और पूरे वाहन का तापमान तुरंत स्कैन कर लेंगे। अगर किसी वाहन का तापमान अधिक होगा तो उसे टनल के बाहर रोक दिया जाएगा, ताकि किसी प्रकार की घटना को रोका जा सके। जब वाहन का तापमान सामान्य हो जाएगा, उसके बाद बैरियर पर स्कैन कर टनल से वाहन को गुजरने दिया जाएगा।

टनल को इतना हाईटेक बना रहे हैं कि इसमें 80 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से वाहन दौड़ सकेंगे। करीब 4500 वाहन प्रतिदिन टनल से गुजर सकेंगे। जाहिर है कि टनल के भीतर प्रदूषण ज्यादा होगा। इसके लिए टनल के भीतर जगह-जगह एयर क्वालिटी चेक करने के लिए उपकरण लगाए जा रहे हैं। सेंसर प्रदूषण को बताएंगे और आटोमेटिक तरीके से मशीनरी टनल के ऊपरी भाग से उसे बाहर निकाल देगी। टनल में ऑक्सीजन की कमी न हो इसकी भी पूरी व्यवस्था की जा रही है।

बीआरओ के लिए जमाव बिंदू से नीचे के तापमान और विपरीत परिस्थितियों में टनल का निर्माण करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा। टनल को देखने और इससे होकर गुजरने के लिए देश-विदेश के लोग भी आतुर हैं। अटल टनल बनने से मनाली से लेह एक ही दिन में पहुंच सकेंगे। बता दें कि अटल टनल का उद्घाटन सितंबर माह में प्रस्तावित हैं। इसके उद्घाटन का एलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिमाचल दौरे के दौरान खुद कर चुके हैं।


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