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हिमाचल में अब पूरी फीस वसूलेंगे प्राइवेट स्कूल, सरकार के कानून की उड़ाई धज्जियां

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में प्राइवेट स्कूलों (Private school) की फीस के मामले में अब पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन पहली बार खुलकर सामने आया है। प्रदेश में प्राइवेट स्कूल आपने हिसाब से खुलकर फीस बसूलेंगे।

हिमाचल में अब पूरी फीस वसूलेंगे प्राइवेट स्कूल, सरकार के कानून की उड़ाई धज्जियां
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प्रतीकात्मक तस्वीर

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में प्राइवेट स्कूलों (Private school) की फीस के मामले में अब पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन पहली बार खुलकर सामने आया है। प्रदेश में प्राइवेट स्कूल आपने हिसाब से खुलकर फीस बसूलेंगे। संगठन ने आज इस बात की शिमला (Shimla) में प्रेसवार्ता से जानकारी दी। इसमें एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष यूएस चौहान (President US Chauhan) ने कहा कि राज्य सरकार ने कोरोना काल में फीस माफ करने के संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किया। लॉकडाउन के दौरान सरकार ने वार्षिक शुल्क को डैफर करने का आदेश जारी किया था, जिसका स्कूलों ने पालन किया। इसलिए अब 1 अप्रैल से शुरू हो रहे नए शैक्षणिक सत्र से स्कूल पूरी फीस (School fees) लेंगे। आपको बता दें कि इस संगठन में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (Himachal Pradesh Board of School Education) से एफिलेटिड स्कूल शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एसोसिएशन के अध्यक्ष यूएस चौहान ने कहा कि नए सत्र से प्रदेश के सभी निजी स्कूल प्रबंधन हिमाचल प्राइवेट स्कूल (Himachal Private School) रेगुलेशन एक्ट-1997 के तहत खुद फीस तय करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ज्यादातर प्राइवेट स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों में हैं, जहां शहरों की अपेक्षा फीस कम है। चौहान ने कहा कि सरकार प्राइवेट स्कूलों की फीस तय करने के लिए कानून बनाने पर विचार कर रही है, जबकि पहले से ही एक्ट बना हुआ है। सरकार के प्रस्तावित कानून का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि सभी स्कूलों की फीस एक समान नहीं हो सकती, क्योंकि सबका मूलभूत ढांचा अलग-अलग है। उन्होंने प्रस्तावित कानून को स्कूलों और अभिभावकों (Parents) के बीच खाई पैदा करने वाला बताया है।

आपको बात दें कि प्राइवेट स्कूल एसो. की प्रेसवार्ता के दौरान ने कहा गया कि निजी स्कूलों में अभिभावक अपने बच्चों को अपनी मर्जी से पढ़ाते हैं। जो अभिभावक गरीब हैं, उनके बच्चों को स्कूल मुफ्त में भी पढ़ाते हैं। कई छात्रों की फीस आधी की गई है। इसकी सूची बाकायदा उपायुक्तों को सौंपी गई है। यदि किसी अभिभावक को स्कूल का फीस स्ट्रक्चर पसंद नहीं है तो वह अपनी स्वेच्छा से निर्णय ले सकता है। कोई स्कूल प्रबंधक उसे रोकेगा नहीं।

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