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1989 में अटल बिहारी वाजपेयी ने पालमपुर में पारित किया था राम मंदिर निर्माण का प्रस्ताव

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का शिलान्यास अब से कुछ ही घंटे बाद होने जा रहा है। अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास के साथ ही हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के पालमपुर का नाम भी इतिहास में दर्ज हो जाएगा।

1989 में अटल बिहारी वाजपेयी ने पालमपुर में पारित किया था राम मंदिर निर्माण का प्रस्ताव
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प्रतीकात्मक तस्वीर

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का शिलान्यास अब से कुछ ही घंटे बाद होने जा रहा है। अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास के साथ ही हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के पालमपुर का नाम भी इतिहास में दर्ज हो जाएगा। क्योंकि पालमपुर में राम मंदिर की बुनियाद रखी गई थी । कारण यह है कि 31 साल पहले राम मंदिर निर्माण का प्रस्ताव पालमपुर में ही पारित हुआ था। पालमपुर में 11 जून, 1989 को अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और शांता कुमार ने राम मंदिर के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया।

काबिलेगौर है कि पलामपुर में हुई इस बैठक की व्यवस्था की जिम्मेवारी उस वक़्त हिमाचल के पूर्व सीएम शांता कुमार को ही दी गई थी और बैठक में अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, विजय राजे सिंधिया समेत अनेक भाजपा नेताओं ने शिरकत की थी। उसी साल दिसंबर में हुए आम चुनाव में भाजपा ने राम मंदिर के निर्माण की बात अपने चुनावी घोषणापत्र में पहली बार कही थी। इसका ही परिणाम था कि साल 1984 में दो सीट जीतने वाली भाजपा ने साल 1989 के चुनाव में 85 सीटें जीत लीं। ये भी गौर करने वाली बात है कि उस वक्त बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यसमिति अब की तुलना में बहुत संतुलित और छोटी हुआ करती थी।

जब पालमपुर की बैठक में कार्यसमिति में प्रस्ताव आया तो इस पर चर्चा हुई, चर्चा के दौरान प्रमुख नेताओं ने अपनी बात रखी। उस वक्त बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी थे. उनकी अध्यक्षता में सभी ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया और फिर सभी की सहमति से यह प्रस्ताव पारित किया गया। राम मंदिर बनने के बाद पालमपुर का भी विशेष स्थान हो जाएगा। क्योंकि यहां जो प्रस्ताव पारित हुआ, उसने कई राहें खोली और पालमपुर में हुए इस फैसले ने आंदोलन को गति भी दी थी। भाजपा कार्यसमिति की बैठक के बाद आयोजित रैली में उमड़ी भीड़ को देखकर अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने सार्वजनिक भाषण में तुरन्त ये कह दिया था कि आगामी होने वाले चुनावों में अगर भाजपा प्रदेश में बहुमत हासिल करती है तो हिमाचल के मुख्यमंत्री फिर से शांता कुमार ही होंगे। इसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में मार्च 1990 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी थी और शांता कुमार ने दूसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली थी।


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