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NFHS की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा- हिमाचल में हर तीसरा व्यक्ति पीता है शराब

हिमाचल प्रदेश में शराब पीने वालों की संख्या में इजाफा हो गया है। आलम यह है कि प्रदेश में ड्रग्स लेने वालों की भी लत बढ़ी है। सूबे में 70 लाख लोग रहते हैं और एक तिहाई शराब पीते हैं।

NFHS की रिपोर्ट में खुलासा: हिमाचल में हर तीसरा व्यक्ति पीता है शराब
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NFHS की रिपोर्ट में खुलासा

हिमाचल प्रदेश में शराब पीने वालों की संख्या में इजाफा हो गया है। आलम यह है कि प्रदेश में ड्रग्स लेने वालों की भी लत बढ़ी है। सूबे में 70 लाख लोग रहते हैं और एक तिहाई शराब पीते हैं। प्रदेश में औसतन हर तीसरा आदमी शराब और तंबाकू का इस्तेमाल कर रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के हर पांच साल पर जारी होने वाले नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) की हालिया रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। वहीं प्रदेश में एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल में शादीशुदा महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा की वारदात पिछले कुछ सालों में बढ़ गईं हैं। हालांकि, कुछ अन्य तरह की घरेलू हिंसाओं में शहरी और ग्रामीण स्तर पर कमी भी आई है।

गांव में बढ़े हैं हिंसा के मामले

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक, 18 से 49 साल की शादीशुदा महिलाओं पर किसी न किसी तरह की हिंसा की गई। शहरी इलाकों में जहां 6 फीसदी महिलाओं ने बताया कि पतियों ने उनसे हिंसा की है। वहीं, ग्रामीण इलाकों में ऐसी घटनाएं 8.7 फीसदी पाई गई हैं। यानी शहरों के मुकाबले गांवों में हिंसा ज्यादा है। कुल मिलाकर ऐसी हिंसा के मामलों में प्रदेश में औसतन आंकड़ा 8.3 प्रतिशत पहुंच गया है। साल 2015-16 के आंकड़ों के मुताबिक ऐसी घटनाओं का प्रतिशत 5.9 ही था।

गर्भवतियों के साथ हिंसा में कमी

प्रदेश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में गर्भवती महिलाओं के साथ किसी भी तरह की हिंसा में कमी देखी गई है। शहरी इलाकों में 18 से 49 साल की उम्र की महिलाओं में हिंसा नहीं होती है। ग्रामीण इलाकों में 0.7 फीसदी गर्भवती महिलाओं के साथ हिंसा हुई है। पांच साल पहले आए सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक पहले हिंसा ज्यादा थी। 2015-16 में पूरे प्रदेश में गर्भवतियों के साथ हिंसा के मामले 1.5 फीसदी थे।

15 साल के 32 प्रतिशत युवक पीते हैं शराब

हेल्थ सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में 15 साल से अधिक उम्र के तकरीबन 32 फीसदी लोग शराब पीते हैं। शहरी इलाकों में जहां यह प्रतिशत 30 फीसदी से ज्यादा है। ग्रामीण इलाकों में 32 फीसदी से ज्यादा लोग शराब का सेवन करते हैं। इसी तरह पूरे प्रदेश में 32 फीसदी से ज्यादा लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। हेल्थ सर्वे बताता है कि महिलाएं भी शराब और तंबाकू का सेवन करती हैं। हालांकि, इनकी संख्या पुरुषों के मुकाबले न के बराबर है। पूरे प्रदेश में जहां 1.7 फीसदी महिलाएं (15 से 49 साल की) तंबाकू खाती हैं। वहीं महज 0.6 फीसदी महिलाएं ही शराब का सेवन करती हैं।

इन जिलों में ज्यादा मामले

राज्य में चार जिलों में सबसे अधिक नशे का सेवन होता है। मंड, कुल्लू, चंबा और शिमला नशे का अधिक प्रयोग हो रहा है। हाल ही में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने नशे की चपेट में आने वाले देश के 272 जिलों की सूची जारी की थी। केंद्र सरकार ने बीते दिनों अंतरराष्ट्रीय नशा विरोधी दिवस पर उक्त 272 जिलों में नशा मुक्ति के लिए 260 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया था।

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