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Himachal: निजी विश्वविद्यालयों में से करीब 300 अयोग्य शिक्षक हटाए जाएंगे, विनियामक आयोग ने जारी किया निर्देश

हिमाचल प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों में अयोग्य शिक्षक नियुक्त होने का मामला सामने आया है। इसका खुलासा निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग की जांच में हुआ। नियुक्तियों को लेकर निजी विश्वविद्यालयों द्वारा यूजीसी के साल 2009 व वर्ष 2016 के नियम का पालन नहीं करने का आरोप है।

Himachal: निजी विश्वविद्यालयों में से करीब 300 अयोग्य शिक्षक हटाए जाएंगे, विनियामक आयोग ने जारी किया निर्देश
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प्रतीकात्मक तस्वीर

हिमाचल के प्राइवेट विश्वविद्यालयों (private universities of himachal) में से अयोग्य कर्मचारियों की छुट्टी होगी (Unqualified employees will be on leave)। इस संबंध में राज्य निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग (State Private Educational Institutions Regulatory Commission) की ओर से विश्वविद्यालय प्रबंधनों को इसी हफ्ते पत्र जारी किया है। जिसमें करीब 285 अयोग्य शिक्षकों की छुट्टी करने का निर्देश दिया गया है। यूजीसी (UGC) द्वारा निर्धारित मानकों की अनदेखी कर कई प्राइवेट विवियों द्वारा करीब 35 प्रतिशत शिक्षकों को नियुक्तियां दी हैं। इसके अतिरिक्त शैक्षणिक योग्यता की सूचना नहीं दिए जाने को लेकर 20 निजी कॉलेजों के प्रार्चाया एवं प्रबंधन समितियों को भी आयोग ने तलब किया है।

प्राइवेट विश्वविद्यालयों में अयोग्य शिक्षक नियुक्त किए जाने के मामले का पर्दाफाश निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग की जांच के बाद हुआ। जांच में सामने आया है कि इन विवियों ने यूजीसी के साल 2009 व साल 2016 के नियमों की अनदेखी की है। इनमें से कई टीचर नेट पास नहीं हैं। नेट पास नहीं होने के बाद भी विशेष छूट के लिए भी इनकी तरफ से कदम नहीं उठा गया। वहीं आयोग ने उन्हें अयोग्य करार दे दिया है। साथ ही संबंधित विवि को उन्हें पद से हटाकर इनके स्थान पर नियम का पालन करते हुए दूसरे शिक्षकों को नियुक्त करने के लिए कहा गया है। आपको बता दें कुछ महीने पहले सभी प्रावेट कॉलेजों के प्रिंसिपलों की शैक्षणिक योग्यता को लेकर पेपेर मांगे गए थे।

वहीं 20 कॉलेजों ने इस संबंध में अभी तक आयोग को कोई सूचना नहीं दी है। इन स्थितियों में आयोग द्वारा इन कॉलेजों की प्रबंधन समितियों व प्रिंसिपलों को नोटिस जारी कर सूचना के साथ तलब किया है। आयोग के अध्यक्ष मेजर जनरल रिटायर अतुल कौशिक का कहना है कि प्राइवेट शिक्षण संस्थानों में गुणात्मक शिक्षा मिले, इसलिए योग्य शिक्षक होने जरूरी हैं। साथ ही निजी विवियों को अयोग्य टीचर्स को हटा देने के निर्देश दिए गए हैं।

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