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हिमाचल प्रदेश के 603 प्रोजेक्टों को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी, तैयार हो सकेंगी बिजली परियोजनाएं

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के 603 प्रोजेक्टों को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी (Supreme Court Approval) दे दी है। आपको बता दें कि उसमें 884.227 हैक्टेयर वन भूमि शामिल है। इतनी वन भूमि यहां पर राजस्व भूमि के साथ मिलेगी, जिस पर करोड़ों रुपए के विकास कार्य हो सकेंगे।

हिमाचल प्रदेश के 603 प्रोजेक्टों को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी, तैयार हो सकेंगी बिजली परियोजनाएं
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प्रतीकात्मक तस्वीर

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के 603 प्रोजेक्टों को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी (Supreme Court Approval) दे दी है। आपको बता दें कि उसमें 884.227 हैक्टेयर वन भूमि शामिल है। इतनी वन भूमि यहां पर राजस्व भूमि के साथ मिलेगी, जिस पर करोड़ों रुपए के विकास कार्य हो सकेंगे। बता दें कि मार्च 2019 के बाद से यहां पर विकास के काम रुक गए थे, जिनको अब गति मिलेगी। 138 परियोजनाएं एफसीए में मंजूर हुई हैं, तो वहीं 465 परियोजनाएं एफआरए में मंजूर हुई हैं। 143 करोड़ रुपए के शिक्षा क्षेत्र के प्रोजेक्ट हैं, वहीं 334 सड़क योजनाएं और 54 स्कूल भवन भी इसमें शामिल हैं। जिन परियोजनाओं के लिए वन भूमि की स्वीकृति हिमाचल को मिली है, उनमें तीन बिजली परियोजनाओं के लिए 7.3566 हैक्टेयर वन भूमि का इस्तेमाल होगा। 27 सड़क परियोजनाओं में 64.2176 हैक्टेयर वन भूमि शामिल है।

मीडिया रिपोर्ट के मुबातिक, आईआईटी प्रोजेक्ट के लिए 124.61 हैक्टेयर जमीन जुड़ी है, वहीं दो डिग्री कालेजों के लिए 5.9239 हैक्टेयर वन भूमि शामिल होगी। एक मॉडल स्कूल के लिए 2.08 हैक्टेयर, दो बिजली सब स्टेशनों को अपग्रेड करने के लिए 0.8529 हैक्टेयर, एक ट्रांसमिशन लाइन के लिए 36.4344 हैक्टेयर, सोलर पावर प्रोजेक्ट के लिए 5.5942 हैक्टेयर, खनन कार्य के लिए 1.3918 हैक्टेयर, कार पार्किंग के लिए 0.154863 हैक्टेयर वन भूमि की स्वीकृति मिली है।

जिन परियोजनाओं को वन भूमि की सशर्त मंजूरी प्रदान की गई है, उनमें दो आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 0.028 हैक्टेयर, 13 कम्युनिटी सेंटर के लिए 1.0529 हैक्टेयर, नौ डिस्पेंसरी व अस्पताल के लिए 1.5648 हैक्टेयर, 12 पेयजल योजनाओं में 3.0341 हैक्टेयर, 191 सड़कों के लिए 101.6577 हैक्टेयर, 49 स्कूल भवनों के लिए 10.7082 हैक्टेयर, पांच स्किल अपग्रेडेशन वोकेशनल सेंटर के लिए 2.6992 हैक्टेयर, पांच टैंक व अन्य वाटर बॉडी के लिए 0.8826 हैक्टेयर, एक उचित मूल्य दुकान के लिए 0.02 हैक्टेयर, इलेक्ट्रिक व टेली लाइन के लिए 0.92 हैक्टेयर, एक माइनर इरीगेशन चैनल को 0.12 हैक्टेयर वन भूमि की इजाजत मिली है।

59 अन्य मामलों में भी वन भूमि की इजाजत एफआरए में मिली है। इसमें 37 सड़कों के लिए 161.7044 हैक्टेयर, एक हैलिपैड के लिए 0.9898 हैक्टेयर, चार ट्रांसमिशन लाइनों के लिए 51.8232 हैक्टेयर, दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को 1.72 हैक्टेयर, पांच पेयजल स्कीमों को 71.1711 हैक्टेयर, चार बिजलीप्रोजेक्टों को 60.6863 हैक्टेयर व 10.6575 हैक्टेयर के छह अन्य प्रोजेक्टों को भी वन भूमि की मंजूरी मिली है। इस तरह हिमाचल को 884.227 हैक्टेयर फोरेस्ट लैंड की मंजूरी मिली है। (एचडीएम)

इन बिजली परियोजनाओं को मिली है मंजूरी

आपको बता दें कि 56.36 करोड़ रुपए की लागत का 66 केवी लाइन सैंज उप केंद्र से लास्टाधार, 12.54 करोड़ रुपए लागत के वर्तमान 33/11 केवी उपकेंद्र के स्तरोन्नयन, दो एमवी सोलर पीवी काजा की स्थापना के लिए 19.31 करोड़ की योजना, 2.07 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित होने वाले 33/11 केवी तलयार मंडी और 6.74 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित होने वाले 33/11 केवी मानव रहित उपकेंद्र मनाली के निर्माण के लिए भी अनुमति प्रदान की है।

पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड की 338.31 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को भी मंजूरी प्रदान की है। इनमें निरमंड से कोटला उपकेंद्र की 31.73 करोड़ रुपए की 66 केवी डी/सी लाइन, 11.97 करोड़ रुपए की कुरथला-बठार से माजरा की 132 केवी ट्रांसमिशन लाइन, अंधेरी (काला अंब) में 66.47 करोड़ रुपए की 220/132/33 केवी उपकेंद्र, दैहन से हमीरपुर 119.58 करोड़ रुपए की 220 केवी ट्रांसमिशन लाइन तथा लाहा में 108.58 करोड़ रुपए की 66/220 केवी हेलिंग उपकेंद्र शामिल है।

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