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साल 1998 में पहली बार उठी थी टनल की मांग, उस समय प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी ने भरी थी निर्माण की हामी

सामरिक दृष्टि से अति महत्त्वपूर्ण रोहतांग टनल लाहुल निवासी टशी दावा उर्फ अर्जुन गोपाल तथा देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की दोस्ती का प्रतीक बनकर हमारे सामने आई है।

साल 1998 में पहली बार उठी थी टनल की मांग, उस समय प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी ने भरी थी निर्माण की हामी
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फाइल फोटो

सामरिक दृष्टि से अति महत्त्वपूर्ण रोहतांग टनल लाहुल निवासी टशी दावा उर्फ अर्जुन गोपाल तथा देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की दोस्ती का प्रतीक बनकर हमारे सामने आई है। वहीं, वयोवृद्ध इतिहासकार एवं सेवानिवृत्त जिला लोक संपर्क अधिकारी रहे छेरिंग दोरजे व अभय चंद राणा की मेहनत अब रंग लाई है। साल 1998 में पहली बार टनल की मांग को लेकर तीनों लोग पहली बार देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी से मिले थे।

टशी दावा तो अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन छेरिंग दोरजे आज भी अटल बिहारी संग हुई बातचीत को याद रखे हुए हैं। 86 वर्ष की आयु में भी छेरिंग दोरजे टनल के लिए की गई कसरत को याद करते हुए कहते हैं कि रोहतांग टनल को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से संबंधित कई महत्त्वपूर्ण बातें हैं, जो उन्होंने साझा की। टशी दावा और वाजपेयी की दोस्ती देश की स्वतंत्रता से पूर्व की रही। स्व. टशी दावा देश के सबसे पुराने गैर-राजनीतिक संगठन आरएसएस के सक्रिय कार्यकर्ता थे। इसी बीच वर्ष 1942 को आरएसएस के एक प्रशिक्षण शिविर के दौरान उनकी पहली मुलाकात गुजरात के बड़ोदरा में अटल बिहारी वाजपेयी से हुई थी। इस दौरान टशी दावा और वाजपेयी के बीच एक घनिष्ठ दोस्ती कायम हुई, लेकिन एक लंबे अरसे तक इन दोनों की मुलाकात जीवन की आपाधापी एवं व्यस्तता के कारण नहीं हो पाई।

इसी बीच उनके मन में लाहुल व मनाली के बीच एक सुरंग निर्मित करने का विचार आया, ताकि यह क्षेत्र देश व दुनिया के साथ लगातार जुड़ा रह सके। इसी विचार को लेकर वे स्वयं, अभय चंद राणा व टशी दावा के साथ लगभग 56 वर्ष के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिलने दिल्ली पहुंचे। इस दौरान उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को लाहुलवासियों को लगभग छह माह तक बर्फ की कैद से छुटकारा दिलाने के लिए रोहतांग सुरंग की मांग रखी। इस पर वाजपेयी ने उन्हें इस टनल को सामरिक दृष्टि से भी अति महत्त्वपूर्ण मानते हुए इसके निर्माण की हामी भरी।

2000 में जब केलांग आए वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी जब तीन जून, 2000 को अपने हिमाचल दौरे के दौरान केलांग पहुंचे, तो उन्होंने लाहुलियों की उपस्थिति में आयोजित एक जनसभा में इस सुरंग के निर्माण की घोषणा की थी। इसके लिए एक समिति का भी गठन किया गया था और समिति के सदस्यों के रूप में बार-बार तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से सुरंग निर्माण की मांग को लेकर हुई मुलाकातों का ही नतीजा था कि केलांग जनसभा में वाजपेयी ने इसके निर्माण की घोषणा की।

बर्फ की कैद से छूटेंगे घाटी के लोग

छेरिंग दोरजे का कहना है कि सामरिक दृष्टि से अति महत्त्वपूर्ण रोहतांग सुरंग अब जल्द की बनकर तैयार होने जा रही है, जिसका सीधा लाभ न केवल लाहुल वासियों को होगा, बल्कि भारतीय सेना को भी लेह तक रसद एवं अन्य सैन्य सामान पहुंचाने में सुविधा होगी तथा सैन्य दृष्टि से यह रास्ता सुरक्षित भी है। अटल रोहतांग टनल को बनाने में पहला श्रेय हमेशा पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल जी को ही जाता है। जिनके प्रयास से यह संभव हो पाया है। अब छह महीने कोई बर्फ की कैद में नहीं रहेगा। यही नहीं पर्यटन की दृष्टि से भी अभर कर सामने देशभर में जिला लाहुल-स्पीति देखने को मिलेगा।

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