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स्विटलाईम फ्रूट बनेगा कमाई का जरिया, आप भी लेना चाहते हैं लाभ तो यहां पढ़ें

हिमाचल प्रदेश को बागबानी राज्य बनाने व बागबानी के जरिए प्रदेश के लोगों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने एशियन विकास बैंक (एडीबी) द्वारा वित्त पोषित एचपी शिवा परियोजना के तहत अमरूद, लीची, मौसम्मी और अनार की खेती होगी।

स्विटलाईम फ्रूट बनेगा कमाई का जरिया, आप भी लेना चाहते हैं लाभ, तो यहां पढ़ें
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अनार की खेती।

हिमाचल प्रदेश को बागबानी राज्य बनाने व बागबानी के जरिए प्रदेश के लोगों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने एशियन विकास बैंक (एडीबी) द्वारा वित्त पोषित एचपी शिवा परियोजना के तहत अमरूद, लीची, मौसम्मी और अनार की खेती होगी। इसके लिए बिलासपुर जिला में बागबानी विभाग ने प्रक्रिया शुरू की है और हरेक ब्लॉक में 150 हेक्टेयर सिंचित एरिया का चयन आईपीएच व बागबानी विभाग की ज्वाइंट टीमें कर रही हैं।

जिला में अगले पांच साल के अंदर 600 हेक्टेयर एरिया चिन्हित कर ज्यादा से ज्यादा किसान बागबानों को इस परियोजना से लाभान्वित करने का लक्ष्य तय किया गया है। यहां बता दें कि शुरुआती दौर में पायलटबेस पर यह परियोजना प्रदेश के चार जिलों बिलासपुर, मंडी, कांगड़ा और हमीरपुर में शुरू की गई, जबकि अब ऊना, सिरमौर व सोलन को भी सम्मिलित किया गया है। चयनित जिलों में परियोजना को लागू करने के लिए 17 समूह गठित किए गए हैं, जिनके अंतर्गत बिलासपुर में चार, मंडी में छह, कांगड़ा में पांच व हमीरपुर जिला में दो समूह, जबकि ऊना में एक और सोलन व सिरमौर में दो दो समूह गठित किए जाएंगे। बताते चलें कि एक समूह में दस हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल किया गया है।

चिन्हित जिलों में परियोजना के अंतर्गत डेढ़ सौ से ज्यादा हेक्टेयर क्षेत्र में फलदार पौधे रोपित किए जाने हैं। इनमें संतरा, लीची, अमरूद व अनार इत्यादि पौधे शामिल हैं। लॉकडाउन के दौरान बागबानी विभाग ने फल पौधरोपण स्थलों को तैयार कर लिया है। इस पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत उन क्षेत्रों को विकसित करने को प्राथमिकता दी गई है जहां अभी तक फल उत्पादन नहीं होता। इसके अतिरिक्त ऐसे स्थानों को भी परियोजना में शामिल किया गया है जहां जंगली जानवरों से प्रभावित किसानों ने खेतीबाड़ी करना छोड़ दिया है ताकि इन क्षेत्रों के लोगों को बागवानी से जोड़कर आर्थिक रूप से सक्षम बनाया जा सके।

इस प्रोजेक्ट के तहत बागवानों की फसलों को बचाने के लिए धरातल से छह फुट ऊंचाई तक कंटीली तारें लगाने के साथ ही इनके ऊपर सोलर फैंसिंग की जाएगी, ताकि लावारिस छोड़े गए पशु और अन्य जंगली जानवर फसलों को नुकसान न पहुंचा सकें। कम ऊंचाई वाली सोलर फैंसिंग को जानवर तोड़ देते हैें और खेतों में घुसकर बड़े स्तर पर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, लेकिन ऊंची एवं कंटीली तारें लगाने से यह समस्या नहीं रहेगी।

प्रोजेक्ट के तहत बागबानों को सिंचाई की सुविधा के लिए चैकडैम बनबाने के लिए भी सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी। जहां-जहां आईपीएच विभाग की सिंचाई स्कीमें हैं उनका भी इस प्रोजेक्ट के तहत इस्तेमाल किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में किसानों के समूह बनाए गए हैं और ट्रायलबेस पर अमरूद, लीची, मौसम्मी व अनार की खेती की जा रही है।

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