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सड़कों पर सवारियां न मिलने से निजी बस ऑपरेटर्स ने सरकार से टैक्स माफ करने की उठाई मांग

हिमाचल प्रदेश के निजी बस ऑपरेटर्स ने सड़कों पर सवारियां न मिलने से राज्य सरकार से टैक्स माफ करने की मांग उठाई है। ऑपरेटर्स का कहना है कि रूटों पर सवारियां कम होने से बसें नहीं चल रही हैं।

सड़कों पर सवारियां न मिलने से निजी बस ऑपरेटर्स ने सरकार से टैक्स माफ करने की उठाई मांग
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प्रतीकात्मक तस्वीर

हिमाचल प्रदेश के निजी बस ऑपरेटर्स ने सड़कों पर सवारियां न मिलने से राज्य सरकार से टैक्स माफ करने की मांग उठाई है। ऑपरेटर्स का कहना है कि रूटों पर सवारियां कम होने से बसें नहीं चल रही हैं। ऐसे में किराया बढ़ाने के बावजूद ऑपरेटर्स को बैंकों की किस्तें देने व टैक्स अदा करना मुश्किल हो गया है।

प्रदेश निजी बस ऑपरेटर यूनियन ने साफ कर दिया है कि अगर राज्य सरकार ने बसों का टैक्स माफ नहीं किया तो ऑपरेटर्स को मजबूर होकर आरटीओ कार्यालय में बसों के कागजात व चाबियां जमा करवानी पड़ेंगी। निजी बस ऑपरेटर यूनियन के प्रधान राजेश पराशर ने कहा कि राज्य में लॉकडाउन के दौरान सभी बसें खड़ी हैं। अनलॉक में कुछ ऑपरेटर्स ने बसों का संचालन आरंभ कर दिया था, मगर राज्य में कुछ ऑपरेटर्स द्वारा ही बसों का संचालन किया गया था।

जो ऑपरेटर रूटों पर बसें चला रहे हैं, उन्हें भी घाटे का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में ऑपरेटर फिर से बसों को खड़ा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीते एक सप्ताह के दौरान राज्य में 150 से 200 निजी बसें खड़ी हो गई हैं। प्रदेश में अब केवल मात्र 350 बसें ही चल पा रही हैं।

प्रधान राजेश पराशर ने कहा कि रूटों पर सवारियां न होने से ऑपरेटर्ज को रोजाना घाटे का सामना करना पड़ रहा है। ऑपरेटर अड्डा फीस अदा नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में ऑपरेटर्स को जहां बैंकों की किस्त अदा करने की चिंता सता रही है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग उठाई है कि निजी बस ऑपरेटर्स का टैक्स माफ किया जाए, अगर टैक्स माफ नहीं किया गया तो ऑपरेटर्स को मजबूर होकर बसों के दस्तावेज व चाबियां आरटीओ के हवाले करनी पड़ेंगी। राज्य में कम संख्या में बसें चलने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में परिवहन का जिम्मा एचआरटीसी पर ही है।

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