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NFHS की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, नाबालिग लड़कियों की शादी के मामले में ये जिला है टॉप पर, यहां जानें हर जिले की स्थिति

हिमाचल में 90 प्रतिशत साक्षरता दर वाले राज्य हिमाचल प्रदेश में आज भी कानूनी उम्र से पहले लड़के और लड़कियों की शादियां की जा रही है। प्रदेश में ऐसी लड़कियों की संख्या 5.4 फीसदी है।

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शादी (प्रतीकात्मक फोटो)

हिमाचल में 90 प्रतिशत साक्षरता दर वाले राज्य हिमाचल प्रदेश में आज भी कानूनी उम्र से पहले लड़के और लड़कियों की शादियां की जा रही है। प्रदेश में ऐसी लड़कियों की संख्या 5.4 फीसदी है। ग्रामीण इलाकों में ऐसी लड़कियां जिनकी शादी 18 साल से पहले हुई है वे 5.1 फीसदी है और शहरी इलाकों में यह आंकड़ा 7.3 फीसदी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है। इस सर्वे की जानकारी 10 हजार 696 परिवारों, 10 हजार 368 महिलाओं और 1477 पुरुषों से ली गई है।

प्रदेश में 18 साल की उम्र से पहले शादी करने वाली लड़कियां जिनकी उम्र सर्वे के दौरान 20 से 24 साल की थी। उनसे बातचीत की गई है। इसमें प्रदेश के शहरी और ग्रामीण इलाकों से आंकड़े एकत्रित किए गए हैं। इससे पहले साल 2015-16 में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 8.6 फीसदी था। यानी 18 साल से कम उम्र में विवाह करने वाली लड़कियों के आंकडों में बीते 3-4 सालों में गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन बावजूद इसके करीब 90 फीसदी साक्षरता वाले राज्य में इस आंकड़े को संतोषजनक नहीं माना जा सकता।

किन्नौर में लड़कियों की कम उम्र में हो रही शादी

18 साल से कम उम्र में विवाह करने वाली लड़कियों की संख्या जनजातीय जिला किन्नौर में सबसे अधिक 27.9 प्रतिशत है। जबकि प्रदेश में सबसे अधिक जनसंख्या वाले जिला कांगड़ा में सबसे कम 1.5 प्रतिशत है। ये आंकड़ा सर्वे के वक्त 20 से 24 साल की उन महिलाओं के आधार पर तैयार किया गया है जिनकी शादी 18 साल से पहले हो गई थी।

लड़कों की शादी भी हो रही उम्र से पहले

वैसे तो लड़कों की शादी उम्र भी कानून में 21 साल है लेकिन हिमाचल में आज भी लड़कों की शादी भी जल्दी हो रही है। सर्वे के दौरान 25 से 29 साल के लड़कों को शामिल किया गया। जिनकी शादी 21 साल से पहले हो गई। ऐसे लड़कों की तादाद प्रदेश में 4.6 फीसदी थी। इनमें से भी 4.1 फीसदी लड़के ग्रामीण इलाकों से संबंध रखते हैं।

प्रदेश में महिलाओं की प्रजनन दर

प्रदेश में शिशु प्रति महिला की प्रजनन दर के विषय में यह बात सामने आई कि ग्रामीण इलाकों में यह दर 1.7 है जबकि शहरी इलाकों में 1.4 है। सर्वेक्षण के मुताबिक, प्रदेश में शिशु प्रति महिला की प्रजनन दर 1.7 है, यानी प्रदेश में हर महिला औसतन 1.7 बच्चों को जन्म देती है।

कम उम्र में ही मां बन रही युवतियां

इसके अलावा राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के दौरान 15 साल से 19 साल की 3.4 फीसदी युवतियां ऐसी थी जो या तो गर्भवती थीं या मां बन चुकी थीं। यानी 3.4 फीसदी युवतियों ने शादी की कानूनी उम्र या उससे पहले मां बन गईं थी या वो गर्भवती थीं। ग्रामीण स्तर पर ऐसी युवतियों की तादाद 3.3 फीसदी और शहरी इलाकों में 4.5 फीसदी है।

ये स्थिति है जिला वार

जिला प्रतिशत

बिलासपुर 10.0

चंबा 3.8

हमीरपुर 3.5

कांगड़ा 1.5

किन्नौर 27.9

लाहौल-स्पीति 11.2

कुल्लू 8.7

मंडी 6.3

शिमला 6.1

सिरमौर 5.0

सोलन 13.3

ऊना 1.6

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