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Lahul Spiti: क्योटो गांव में नेटवर्क न होने से बच्चे 10 किलोमीटर बर्फ में पैदल जाकर करते हैं ऑनलाइन पढ़ाई

हिमाचल प्रदेश के लाहुल-स्पीति जिले के कियामो व क्योटो गांव के बच्चों को अपनी ऑनलाइन पढ़ाई करने के लिए अपने गांव से दस किलोमीटर दूर पैदल जाकर जिओ के मोबाइल सिग्नल में पढ़ाई करने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

Lahul Spiti: क्योटो गांव में नेटवर्क न होने से बच्चे 10 किलोमीटर बर्फ में पैदल जाकर करते हैं ऑनलाइन पढ़ाई
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प्रतीकात्मक तस्वीर

कोरोना वायरस से फैली वैश्विक महामारी के चलते शिक्षण संस्थान स्कूल कालेज बंद होने के कारण शिक्षा विभाग द्वारा ऑनलाइन पढ़ाई की जा रही है। प्रदेश के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा ग्रहण करने के लिए बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए इन सर्द दिनों में कड़क ठंड के चलते बर्फ पर चल कर ऐसे स्थान पर पहुंचना पड़ता है, जहां पर जिओ का सिग्नल मिलता हो। हिमाचल प्रदेश के लाहुल-स्पीति जिले के कियामो व क्योटो गांव के बच्चों को अपनी ऑनलाइन पढ़ाई करने के लिए अपने गांव से दस किलोमीटर दूर पैदल जाकर जिओ के मोबाइल सिग्नल में पढ़ाई करने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

वहीं पर निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों के साथ प्रदेश सरकार ने एक नहीं कई बार फीस व स्कूल के अन्य वार्षिक खर्चे से संबंधित अधिसूचना जारी कर पहले साफ इनकार किया गया, अब निजी स्कूल वालों को खुली छूट दे दी गई है कि स्कूल के सभी खर्चे अभिभावकों से वसूल सकते हैं। भारतवर्ष के किसी भी राज्य के बच्चों को शायद ही अपनी शिक्षा ग्रहण करने के लिए अपने घर से पैदल चल कर किसी स्कूल व कोचिंग सेंटर जाने के बजाय बर्फ की ऊंची-ऊंची पहाडि़यों में जा कर अपनी पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा हो।

लाहुल-स्पीति के काज़ा उपमंडल के अंतर्गत आने वाले कियामो, क्योटो हंसा गांव में मोबाइल सिग्नल न होने से स्कूल के बच्चों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। मोबाइल सिग्नल न होने से बच्चों को अपनी ऑनलाइन पढ़ाई करने के लिए बर्फ में पैदल चलकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।

कियामो गांव के तेंजीन तनपा ने कहा कि गांव में मोबाइल सिग्नल होने से बच्चों को बर्फ में 10 से 12 किलोमीटर पैदल चल कर लोसर गांव में जिओ के सिग्नल में पढ़ाई करने पर मजबूर हुए हैं। तेंजीन तनपा ने कहा है कि 15 दिनों के भीतर जिला प्रशासन ने ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए, तो क्षेत्र के सभी लोगों को संगठित होकर सड़कों पर आकर प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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