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एंबुलेंस रोड नहीं होने से नाराज सैंकड़ों लोगों ने रेलवे ट्रैक पर काटा बवाल, ट्रेन रोकी

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला मुख्यालय से मात्र सात किलोमीटर दूर लोगों का गुस्सा फूटा है। नगर निगम शिमला के मज्याठ वार्ड में एम्बुलेंस रोड की सुविधा नहीं है। इस वजह से लोग कालका शिमला रेलवे ट्रैक पर बैठ गए हैं।

एंबुलेंस रोड नहीं होने से नाराज सैंकड़ों लोगों ने रेलवे ट्रैक पर काटा बवाल, ट्रेन रोकी
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एंबुलेंस रोड न होने से नाराज लोगों ने रोकी ट्रेन।

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला मुख्यालय से मात्र सात किलोमीटर दूर लोगों का गुस्सा फूटा है। नगर निगम शिमला के मज्याठ वार्ड में एम्बुलेंस रोड की सुविधा नहीं है। इस वजह से लोग कालका शिमला रेलवे ट्रैक पर बैठ गए हैं। वार्ड पार्षद दिवाकर देव शर्मा के नेतृत्व में सैंकड़ों लोग रेलवे ट्रैक पर इक्कठे हुए और रेल ट्रैक पर आने वाली ट्रेन को रोक दिया। इस दौरान पुलिस के भी जवान मौके पर मौजूद रहे।

लेकिन लोगों के प्रदर्शन के चलते ट्रैन को जतोग स्टेशन पर ही रोक दिया। साल 2017 में यह वार्ड नगर निगम के अस्तित्व में आया है, लेकिन रेलवे और निगम के बीच चल रहे जमीनी विवाद के चलते वार्ड के लोगों को एम्बुलेंस रोड़ की सुविधा नहीं मिल पाई है।

रेलवे के अधिकारियों ने इस मामले पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया है और मामले पर उच्च अधिकारियों पर निर्णय लेने के लिए छोड़ दिया है। रेलवे मंत्री से मिलने के बाद भी नहीं मिली जमीन की एनओसी एम्बुलेंस रोड़ के लिए जमीन पर एनओसी न देने पर अब वार्ड की जनता ने रेलवे के खिलाफ आंदोलन शुरू कर किया है। रेलवे मंत्री से मिलने के बाद भी नहीं मिली जमीन की एनओसी एम्बुलेंस रोड़ के लिए जमीन पर एनओसी न देने पर अब वार्ड की जनता ने रेलवे के खिलाफ आंदोलन शुरू कर किया है।।

वार्ड पार्षद दिवाकर शर्मा के मुताबिक, वार्ड में एम्बुलेंस रोड़ के लिए साल 2017 से कवायद शुरु की गई है, जिस पर सरकार और रेलवे विभाग से कई बार मुलाकात और ज्ञापन सौंपकर रास्ता देने की मांग की है, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी क्षेत्र की जनता को एम्बुलेंस रोड़ की सुविधा का लाभ नहीं मिली है।

धरने में वॉर्ड के लोग काफी संख्या में पहुंचे हैं। इनमें बच्चे और महिलाओं भी शामिल हैं। लोग ट्रैक पर बैठे हुए हैं। उन्होंने बताया कि रेलवे से लगती जमीन को लेकर इस मामले दो साल पहले तत्कालीन रेलवे मंत्री पीयूष गोयल के समक्ष मामला उठाया था, लेकिन उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

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