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बिजली बोर्ड के निजीकरण को लेकर सड़कों पर उतरने की तैयारी में जुटे कर्मचारी

हिमाचल में बिजली के निजीकरण को लेकर बिजली विभाग के कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरने का मन बना लिया है। प्रदेश के बिजली कर्मचारियों को एक बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहना होगा।

बिजली
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प्रतीकात्मक तस्वीर

हिमाचल में बिजली के निजीकरण को लेकर बिजली विभाग के कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरने का मन बना लिया है। प्रदेश के बिजली कर्मचारियों को एक बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहना होगा। यही नहीं बिजली बोर्ड के लगभग 26000 पेंशन की समाजिक सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी। प्रदेश की जनता को भी इस 'बोर्ड बचाओ आंदोलन' में शमिल करना होगा । प्रदेश में स्टेट इलेक्ट्रीसिटी बोर्ड इंप्लाइज यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप खरवाड़ा ने कहा कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा बिजली कंपनियों के निजीकरण को लेकर जो दस्तावेज भेजे गए हैं, उन दस्तावेजों के बारे में विस्तार में चर्चा की।

प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 20 सितंबर को राज्यों को प्रेषित किए गए स्टैंडर्ड बिडिंग डाक्यूमेंट विद्युत वितरण कंपनियों के संपूर्ण निजीकरण का दस्तावेज है। यह दस्तावेज जारी हो जाने के बाद यदि किसी राज्य को विद्युत वितरण कंपनी का निजीकरण करना है, तो ट्रांसफर स्कीम, रिक्वेस्ट फॉर प्रोपोजल, बिडिंग की प्रक्रिया और बिडिंग के उपरांत शेयर होल्डर के करार का मसौदा आदि सब बातें केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए बिडिंग डॉक्यूमेंट में बहुत विस्तार से रेडीमेड दे दी गई हैं।

इन डाक्यूमेंट को तैयार करने में अब किसी राज्य को समय नहीं लगाना होगा। उन्होंने कहा कि ट्रांसफर स्कीम में साफ लिखा है कि निजीकरण के बाद कर्मचारी निजी कंपनी के कर्मचारी हो जाएंगे और सरकारी डिस्कॉम कर्मचारियों की सेवांत सुविधाओं यथा पेंशन, ग्रेच्युटी आदि का उत्तरदायित्व केवल उसी दिन तक लेगी, जिस दिन तक वे सरकारी डिस्कॉम के कर्मचारी हैं। निजी कंपनी के नियमों व सेवा-शर्तों के अनुसार कर्मचारियों को कार्य करना होगा।

केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए स्टैंडर्ड बिडिंग डाक्यूमेंट में यह लिखा है कि निजीकरण का प्रस्ताव तय किए जाने के बाद 32 सप्ताह में कंपनी को निजी क्षेत्र को हैंड ओवर कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा परिस्थितियां चुनोतिपूर्ण है। प्रदेश के बिजली कर्मचारियों को एक बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहना होगा। यही नहीं बिजली बोर्ड के लगभग 26000 पेंशन की समाजिक सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी।

प्रदेश की जनता को भी इस 'बोर्ड बचाओ आंदोलन' में शमिल करना होगा । उन्होंने प्रदेश सरकार से अपील की है कि दस्तावेज पर केंद्र सरकार द्वारा मांगे गए सुझाव के संदर्भ में राज्य में बिजली कंपनी के निजीकरण का विरोध करे। इस अवसर पर जगमेल ठाकुर उप-महासचिव, उपप्रधान कामेश्वर शर्मा, अशोक भारद्वाज, देवेंद्र शर्मा, दौलत राम राणा, सुंदरनगर यूनिट के प्रधान कनव राणा, प्रेम ठाकुर, हरीश कुमार, दिनेश ठाकुर समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे।

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