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हिमाचल में 18 से चलेगा कोविड सर्च अभियान, बढ़ते मामलों को देखते हुए लिया फैसला

प्रदेश में बढ़ रहे कोरोना मरीजों ने सरकार को भी चिंता बढ़ा दी है। सरकार ने अब निर्णय लिया है कि प्रदेश में 18 नवंबर से कोविड सर्च अभियान चलाया जाएगा, जिसमें घर-घर जाकर कोविड मरीजों की पहचान की जाएगी।

हिमाचल में 18 से चलेगा कोविड सर्च अभियान, बढ़ते मामलों को देखते हुए लिया फैसला
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प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रदेश में बढ़ रहे कोरोना मरीजों ने सरकार को भी चिंता बढ़ा दी है। सरकार ने अब निर्णय लिया है कि प्रदेश में 18 नवंबर से कोविड सर्च अभियान चलाया जाएगा, जिसमें घर-घर जाकर कोविड मरीजों की पहचान की जाएगी। यह अभियान भी पहले की तरह ही चलाया जाएगा, जैसा की प्रदेश सरकार ने लॉकडाउन के दौरान चलाया था। इसी सप्ताह जिलाधीशों को इस बारे में शेड्यूल जारी हो जाएगा। इसमें आशा वर्करों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं समेत पीएचसी, सीएचसी के डाक्टरों की भी मदद ली जाएगी। मौके पर ही संदिग्धों के सैंपल लिए जाएंगे।

सरकार यह अभियान एक महीने तक चलाएगी। अभियान में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि राज्य में कोविड मरीजों की पहचान कर उन्हें अस्पताल पहुंचाया जा सके। इस अभियान में हेल्थ वर्कर घर-घर जाकर घरवालों से पूछताछ करेंगे। इसमें यह रिकार्ड रखा जाएगा कि घर से कोई कोविड संक्रमित तो नहीं हो चुका है। कोई बीमार है, तो उसके बारे में भी रिकार्ड रखा जाएगा।

अगर कोविड से मिलते-जुलते लक्षण मिलते हैं, तो तुरंत वहीं पर उसका सैंपल लिया जाएगा। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो उसे उसी समय अस्पताल भेज दिया जाएगा, ताकि समय रहते उसका उपचार हो सके। इसके अलावा सरकार की सबसे ज्यादा नजरें मरीजों पर भी होंगी। जो मरीज अन्य बीमारियों से ग्रसित हैं, उन्हें बचाना भी सरकार की प्राथमिकता होगी।

गौरतलब है कि राज्य के तीन जिलों में कोविड संक्रमण तेजी से दोबारा फैलना शुरू हो गया है। जैसे ही सरकार ने लोगों को छूट दी है, वैसे ही संक्रमण भी तेजी से फैला है। शिमला, मंडी और कुल्लू में कोविड-19 के एक्टिव मरीजों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। कुल्लू की स्थिति भी दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। शिमला में इस समय 867 मरीज एक्टिव हैं। मंडी में 681 एक्टिव मरीज हैं। कुल्लू में 1084 एक्टिव मरीज है। ऐसे में अन्य जिलों में भी धीरे-धीरे संक्रमण फैलता जा रहा है। इसी को देखते हुए सरकार यह अभियान चलाने जा रही है, ताकि संक्रमण के फैलने की रफ्तार को कम किया जा सके और मौत के आंकड़ों में भी कमी लाई जा सके।

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