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लाहौल स्पीति के लिए वरदान साबित होगी अटल टनल रोहतांग

हिमाचल प्रदेश के मनाली में समुद्रतल से करीब दस हजार फीट की ऊंचाई पर बनी अटल टनल रोहतांग जीवनदायिनी से कम नहीं है। हिमाचल के दुर्गम जिले लाहौल स्पीति के लिए यह टनल वरदान है।

लाहौल स्पीति के लिए वरदान साबित होगी अटल टनल रोहतांग
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प्रतीकात्मक तस्वीर

हिमाचल प्रदेश के मनाली में समुद्रतल से करीब दस हजार फीट की ऊंचाई पर बनी अटल टनल रोहतांग जीवनदायिनी से कम नहीं है। हिमाचल के दुर्गम जिले लाहौल स्पीति के लिए यह टनल वरदान है। क्योंकि यह इलाका देश और दुनिया से छह महीने के लिए कट जाता था। केवल हवाई मार्ग से ही जुड़ा रहता था। छह महीने भारी बर्फबारी के चलते रोहतांग पास बंद हो जाता था। ऐसे में इकलौता सड़क मार्ग लेह-मनाली हाईवे पर वाहनों की रफ्तार थम जाती थी।

अब रोहतांट टनल बनकर तैयार हो चुकी है। ऐसे में लाहौल की तस्वीर बदल जाएगी। यहां टूरिस्ट आसानी से पहुंच सकेंगे। साथ ही विंटर टूरिज्म इलाके की तस्वीर और आर्थिकी बदल देगा। टनल के बन जाने से मनाली से लेह की दूरी लगभग 46 किलोमीटर कम हो गई है। टनल की वजह से आवागमन में आसानी होगी। लाहौल वासी अब किसी भी तरह की आपात स्थिति में हवाई सेवा पर निभर्र नहीं रहेंगे। अटल टनल रोहतांग का साउथ पोर्टल काफी खू्बसूरत है। टनल के साउथ पोर्टल के प्रवेश द्वार को पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित किया गया है।

इस टनल के साउथ पोर्टल के प्रवेश द्वारा को कुल्लवी काष्ठकुणी शैली में लकडी और पत्थरों से तैयार किया गया है, जिसमे लाईटों का इस्तेमाल किया गया है। लाहौल में टूरिस्ट गतिविधियां बढ़ने से यहां रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे पहले, इस इलाके में खेती-बाढ़ी ही एक मात्र रोजगार का जरिया थी। यहां सेब, मटर और आलू की खेती बड़े पैमाने पर होती थी।

इससे ही लोगों की आय होती है। लेकिन अब होम स्टे, होटल और अन्य कारोबार यहां बढ़ेगा। मनाली एसडीएम रमन घरसंगी ने बताया कि अटल बनकर तैयार हो गई है। प्रदेश सरकार ने टनल को प्रर्यटन की दृष्टि से विकसित किया है। पर्यटकों के लिए एक विस्टा डोम बस का भी संचालन किया जाएगा, जिसमें बैठकर पर्यटक टनल के दीदार कर सकेंगे।

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