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गौशाला में लगी आग, ग्रामीणों की कड़ी मशक्कत के बाद मवेशियों को बचाया

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले (Mandi District) के सकलाना पंचायत के अंतर्गत आने वाले गांव गहरा के आसपास के जंगल (Forest) और घासनी में दो दिनों से आग लगी हुई है। आग ने जंगल में कोहराम (Chaos) मचा रहा है। लेकिन अब आग आम लोगों को भी नुकसान पहुंचाने लगी है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले (Mandi District) के सकलाना पंचायत के अंतर्गत आने वाले गांव गहरा के आसपास के जंगल (Forest) और घासनी में दो दिनों से आग लगी हुई है। आग ने जंगल में कोहराम (Chaos) मचा रहा है। लेकिन अब आग आम लोगों को भी नुकसान पहुंचाने लगी है। यहां गांव से कुछ दूरी पर गौशाला (Gaushala) को भी आग ने अपने काबू में ले लिया है। आगजनी (Fire) के इस तांडव में गांव गहरा निवासी राजमल की गौशाला राख हो गई। वहीं गौशाला में बंधे मवेशियों को ग्रामीण द्वारा कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया।

बता दें कि आग जंगल और घासनी में 2 दिन से सुलग रही है, पर फॉरेस्ट डिर्पाटमैंट के कर्मचारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। शुक्रवार को पूरा दिन आग बुझाने के लिए ग्रामीण भागते रहे और बड़ी मुश्किल से गांव को आग से हवाले से बचाया, पर रात को चिंगारी ने गौशाला को चपेट में ले ही लिया। गांव वालों की मदद से मवेशियों को बचाया गया।

ग्रामीणों के अनुसार, गांव गहरा निवासी गॢमयां आते ही आगजनी की ऐसी घटनाओं से सहमे रहते हैं। हर साल दूसरे गांवों के लोग अपनी घासनी में आग लगाकर भाग जाते हैं और नुक्सान गहरा गांवों के बांशिंदों को उठाना पड़ता है। ऐसा नहीं है कि इस बारे में फॅरेस्ट विभाग के अधिकारियों को शिकायत नहीं की जाती, पर हमेशा ही वे अनुसना कर देते हैं। हर साल यह आगजनी का सिलसिला चलता रहता है। वहीं कुछ साल पहले आगजनी में एक महिला की झूलसकर मौत हो गई थी। विभाग को बार-बार सूचना देने के बाद भी कार्रवाई नहीं की जाती जिसका खामियाजा गांव वासियों को उठाना पड़ता है।

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