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मंडी-पठानकोट फोरलेन का निर्माण कार्य मार्च के बाद होगा शुरू, भूमि अधिग्रहण का काम हुआ पूरा

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में मार्च के बाद मंडी-पठानकोट फोरलेन (Mandi-Pathankot Fourlane) का काम शुरू हो जाएगा। इस कार्य को तुरंत शुरू करने के लिए लगातार प्रयास चल रहे हैं। लेकिन अब जल्द ही मंडी-पठानकोट फोरलेन का कार्य शुरू होने जा रहा है।

मंडी-पठानकोट फोरलेन का निर्माण कार्य मार्च के बाद होगा शुरू, भूमि अधिग्रहण का काम हुआ पूरा
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प्रतीकात्मक तस्वीर

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में मार्च के बाद मंडी-पठानकोट फोरलेन (Mandi-Pathankot Fourlane) का काम शुरू हो जाएगा। इस कार्य को तुरंत शुरू करने के लिए लगातार प्रयास चल रहे हैं। लेकिन अब जल्द ही मंडी-पठानकोट फोरलेन का कार्य शुरू होने जा रहा है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण का काम भी करीब पूरा कर लिया गया है। इतना ही नहीं, अधिकारिक सूत्रों की मानें, तो इसके लिए नेशनल हाई-वे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (National High-Way Authority of India) की ओर से बाकायदा टेंडरिंग प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। कंडवाल से लेकर सिहुणी तक के पैच तक करीब 12 सौ करोड़ रुपए की टेंडरिंग प्रक्रिया पूरी भी हो चुकी है, जिसे अप्रैल में अमलीजामा पहनाए जाने की भी बात कही जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपिटेंट अथॉरिटी फॉर लैंड एक्यूजेशन यानी काला (भूमि अधिग्रहण के लिए सक्षम प्राधिकारी) सुरेंद्र कुमार की मानें, तो उनकी ओर से कंडवाल से लेकर भेडखड्ड तक भूमि अधिग्रहण की पूरी फायल तैयार कर संबंधित अथॉरिटी यानी नेशनल हाई-वे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के सुपुर्द कर दी गई है।

इस दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा है, जिसमें भूमि अधिग्रहण के लिए सर्वे के दौरान कई अलग-अलग सर्किल के मुताबिक अलग-अलग तय राशि के तहत भूमि को अधिग्रहण करने की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी। इस दौरान एनएचएआई (NHA I) की ओर से तैयार किए जाने वाले फोरलेन की चपेट में ऐसे भी भू-मालिक आए हैं, जिन्हें महज़ 97 रुपए प्रति स्किवेयर मीटर के हिसाब से भी मुआवजा दिया जाना तय है, तो वहीं कुछ क्षेत्रों में 17 हजार रुपए प्रति सिक्वेयर मीटर के तहत मुआवजा दिया जाएगा।

हालांकि फोरलेन की चपेट में आने वाले लोगों ने मुआवजे की उचित राशि के लिए संघर्ष आंदोलन छेड़ रखा है। कुछ स्थानों पर लोग उन्हें उचित मुआवजा (Compensation) देने को लेकर अभी भी अड़े हुए हैं। बावजूद इसके जहां नेशनल हाई-वे अथॉरिटी ऑफ इंडिया टेंडरिंग प्रक्रिया भी मुकम्मल करने में जुट चुकी है, तो फिर इन भू-मालिकों का क्या होगा, जिनकी जमीनों का अधिग्रहण (Acquisition) करने के लिए स्थानीय स्तर पर गठित कमेटी काला की ओर से फाइल एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर तक पहुंचा दी गई है और अब वह बाकायदा इसे अमलीजामा पहनाने की दिशा में भी आगे बढ़ चुके हैं।

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