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बीमारी की चपेट में आए सेब के बगीचे, बागवानों की बढ़ी परेशानी

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब (Apple) के बगीचे अज्ञात बीमारी (disease) की चपेट में आ गए हैं। हिमालयन एपल ग्रोवर सोसायटी ने बागवानी विश्वविद्यालय नौणी को बीमारी के नमूने जांच के लिए भेजे हैं।

बीमारी की चपेट में आए सेब के बगीचे, बागवानों की बढ़ी परेशानी
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प्रतीकात्मक तस्वीर

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब (Apple) के बगीचे अज्ञात बीमारी (disease) की चपेट में आ गए हैं। हिमालयन एपल ग्रोवर सोसायटी ने बागवानी विश्वविद्यालय नौणी को बीमारी के नमूने जांच के लिए भेजे हैं। बगीचों में सेब पर उभरे हुए काले रंग के दाने दिखाई दे रहे हैं। बागवान बैक्टीरिया (Gardener Bacteria) के कारण बीमारी होने की आशंका जता रहे हैं। सोसायटी के अध्यक्ष विनीत कुमार सरजोल्टा ने बताया कि रोहड़ू के नंदपुर, जुब्बल के रुईलधार के अलावा छाजपुर, कठासु और चंद्रपुर सहित अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों के बगीचों में सेब पर इन दिनों काले रंग के उभरे हुए बारीक दाने दिखाई दे रहे हैं।

बगीचों में पहले कभी भी इस तरह की बीमारी के लक्षण नहीं दिखे, इसलिए बागवान चिंतित हैं। बीमारी को लेकर असमंजस की स्थिति को खत्म करने के लिए सोसाइटी ने बीमारी के नमूने बागवानी विश्वविद्यालय नौणी को जांच के लिए भेजे हैं। बागवानों से आग्रह है कि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की ओर से दी जाने वाली सलाह के आधार पर ही बीमारी का उपचार करें। अपने स्तर पर बीमारी की रोकथाम के लिए प्रयोग करने से बचें।

बागवानी विश्वविद्यालय नौणी के डिपार्टमेंट ऑफ प्लांट पैथोलॉजी के प्रमुख डॉ. एचआर गौतम ने बताया कि मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण सेब की बाहरी त्वचा पर लेंटी सेल उभरे प्रतीत हो रहे हैं। 15 से 20 दिनों के भीतर सेब में प्राकृतिक रूप से रंग आने के बाद यह समस्या अपने आप खत्म हो जाएगी। बागवानों को बागवानी विभाग की ओर से जारी स्प्रे शेड्यूल का पालन करना चाहिए और फं गीसाइड के साथ किसी भी प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्वों को मिलाकर छिड़काव करने से बचना चाहिए।

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