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महिलाओं ने थामी Kisan Andolan की कमान, बोलीं- मांगें पूरी होने तक यहीं डटी रहेंगी

इस दौरान महिलाओं ने न सिर्फ मुख्य मंच को खुद संभाला, बल्कि मंच के सामने भीड़ भी महिलाओं की ही रही। मंच से महिलाओं ने लगातार हुंकार भरी औैर आंदोलनरत किसानों में अपने भाषणों से जोश भरा। इस दौरान महिलाओं ने बारी-बारी से किसान नेत्रियों को भाषण के लिए आमंत्रित किया। इस दौरान उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित भी किया गया।

महिलाओं ने थामी Kisan Andolan की कमान, बोलीं- मांगें पूरी होने तक यहीं डटी रहेंगी
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बहादुरगढ़। टीकरी बॉर्डर पर किसानों को संबोधित करती डॉ. संतोष दहिया।

हरिभूमि न्यूज. सोनीपत-बहादुरगढ़

केंंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर किसान आंदोलन की कमान महिलाओं ने थामे रखी। मुख्य मंच से किसानों को संबोधित करते हुए महिलाएं बोली-आखिरी सांस तक बॉर्डर पर ही डटी रहेंगी, लेकिन जब तक मांगे पूरी नहीं होती, तब तक पीछे नहीं हटेंगी। इस दौरान महिलाओं ने न सिर्फ मुख्य मंच को खुद संभाला, बल्कि मंच के सामने भीड़ भी महिलाओं की ही रही। मंच से महिलाओं ने लगातार हुंकार भरी औैर आंदोलनरत किसानों में अपने भाषणों से जोश भरा। इस दौरान महिलाओं ने बारी-बारी से किसान नेत्रियों को भाषण के लिए आमंत्रित किया। इस दौरान उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित भी किया गया।

किसान आंदोलन के दौरान संयुक्त किसान मोर्चा ने महिला दिवस पर आंदोलन की कमान महिलाओं के हाथों में देने का निर्णय लिया था। पूर्व घोषित कार्यक्रम के अंतर्गत सोमवार को महिलाओं ने न सिर्फ आंदोलन की कमान संभाली, बल्कि किसानों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर आंदोलन को मजबूती दी। महिलाओं ने मंच से आह्वान किया कि तीन कृषि कानून वापस होने तक वे वापस नहीं जाएंगी। महिलाओं ने कहा कि आज की महिलाएं केवल चूल्हे-चौके तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने हक के लिए लड़ना भी जानती हैं। महिलाओं ने कहा कि पिछले 102 दिनों से उनके पजिरन यहां आंदोलन की कमान संभाले हुए हैं। भीषण सर्दी, बारिश का सामना करने के बाद अब उनके परिजन गर्मी का सामना करने के लिए तैयार हैं। महिलाओं ने सरकार को चेताया कि जब तक सरकार उनकी मांगे पूरी नहीं करती, तब तक वे यहां से पीछे नहीं हटेंगी और बॉर्डर पर डटे अपने परिजनों के साथ ही आंदोलन को मजबूती के साथ आगे बढ़ाती रहेंगी।

पंजाब से पहुंची 5 हजार महिलाएं

महिला दिवस को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने पहले से ही सभी तैयारियां पूरी कर ली थी। धरनास्थल पर ही महिला दिवस मनाने का निर्णय लिया गया था। महिला दिवस मनाने के लिए प्रदेश के साथ ही पंजाब से भी करीब पांच हजार महिलाएं कुंडली बॉर्डर पर पहुंची और महिला शक्ति को मजबूत करते हुए आंदोलन के लिए हुंकार भरी। महिलाओं ने कहा कि वे भी पुरुषों से कम नहीं है और अपने हक के लिए डटे रहना जानती हैं।

वहीं बहादुरगढ़ मेें तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ 100 से ज्यादा दिनों से चल रहे आंदोलन को सोमवार को हजारों महिलाओं ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर नई ताकत प्रदान की। शहर के बाईपास पर भाकियू एकता (उग्राहा) और टीकरी बॉर्डर पर चल रहे संयुक्त किसान मोर्चा के धरने पर सोमवार को हजारों महिलाओं ने उपस्थिति दर्ज करवाई। वहां महिलाओं ने सरकार को ललकारा कि आंदोलन खत्म नहीं बल्कि और मजबूती से आगे बढ़ेगा।

बता दें कि 26 नवंबर से दिल्ली की तीन सीमाओं सिंघु, टिकरी और गाजीपुर में बड़ी संख्या में पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आए किसान डटे हुए हैं। किसान आंदोलन में शुरूआत से ही बड़ी संख्या में महिला किसान भी पहुंच रही थी। लेकिन सोमवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर दोनों प्रदर्शन स्थलों की कमान और प्रबंधन महिलाओं के हाथों में रहा। महिलाओं ने दोनों धरनास्थलों पर अपनी ताकत का बखूबी एहसास करवाया। महिलाओं ने केवल मंच प्रबंधन ही नहीं किया। बल्कि संबोधन भी महिलाओं द्वारा ही किया गया। जसबीर कौर, सुदेश गोयत, अमरजीत कौर, चरणजीत कौर, एनी राजा, कविता आर्य, रागिनी कलाकार राकेश श्योराण आदि ने महिलाओं को संबोधित किया। पंजाब व हरियाणा के गांवों से बड़ी संख्या में महिलाएं इसके लिए यहां पहुंची। चूंकि बीकेयू-उग्रहा के पास सभी किसान संगठनों में सबसे बड़ा महिला विंग है। इसीलिए बाईपास पर बड़ा शक्ति प्रदर्शन हुआ। उम्मीद है कि ज्यादातर महिलाएं 9 मार्च को पंजाब और हरियाणा के अपने गांवों में लौट जाएंगी। हालांकि कुछ महिलाएं अपनी मर्जी से प्रदर्शनस्थल पर रुक भी सकती हैं।




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