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सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के खिलाफ धरने पर बैठ गई महिलाएं

बीरमति चहल, रितु विरोधिया और बबीता ने कहा कि ग्रामीण महिलाएं खेती के काम में पुरुषों के साथ बराबर का सहयोग करती हैं तथा कृषि पर कोई संकट आने की स्थिति में महिलाओं पर प्रतिकूल प्रभाव अधिक होता है।

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के खिलाफ धरने पर बैठ गई महिलाएं
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महिला किसान दीनबंधु चौ. छोटूराम के प्रतिमा स्थल पर धरने पर बैठी हुई। फोटो : हरिभूमि

हरिभूमि न्यूज . गोहाना। सोमवार को महिला किसान दिवस के उपलक्ष्य में दीनबंधु चौ. छोटूराम के प्रतिमा स्थल पर महिलाओं ने धरना दिया। महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के बॉर्डरों पर चल रहे धरनों से महिलाओं को घर वापस भेजने के बयान का कड़ा विरोध किया।

धरना समतामूलक महिला संगठन, मेहनतकश किसान मजदूर संगठन और जन संघर्ष मंच की महिला सदस्यों ने संयुक्त रूप से दिया। बीरमति चहल, रितु विरोधिया और बबीता ने कहा कि ग्रामीण महिलाएं खेती के काम में पुरुषों के साथ बराबर का सहयोग करती हैं तथा कृषि पर कोई संकट आने की स्थिति में महिलाओं पर प्रतिकूल प्रभाव अधिक होता है।

जया विरोधिया, कमलेश और बिमला रावत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस का वह बयान महिलाओं के लिए अपमानजनक है जिसमें उन्होंने बॉर्डरों पर चल रहे धरनों से महिलाओं को वापस घर भेजने के लिए कहा है। महिलाओं ने कहा कि किसान आंदोलन में महिलाएं बराबर की भागीदार हैं। चीफ जस्टिस को सार्वजनिक रूप से अपना बयान वापस ले लेना चाहिए।

सोनिया, मूर्ति, प्रीति अत्री और पूजा ने कहा कि कृषि कानूनों का जितना खराब असर पुरुष किसानों पर पड़ा है, उससे कहीं ज्यादा असर महिलाओं पर होना है। ऐसे में आंदोलन को सफल बनाने के लिए महिलाएं अपनी हिस्सेदारी और भी बढ़ाएंगी। तीनों कृषि कानूनों की वापसी से कम कुछ भी मंजूर नहीं किया जाएगा। केन्द्र सरकार को हठधर्मिता छोड़ कर अन्नदाता की भावना का सम्मान करते हुए तीनों कानून वापस ले लेने चाहिए।



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