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इस टेक्नोलॉजी ​से बिना Petrol चलेगी बाइक, खर्चा ना के बराबर, माइलेज भी देगी ज्यादा

हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के युवक ऋषिपाल ने ऐसी तकनीक से मोटरसाइकिल चलाई है, इसके लिए बाइक के इंजन को न ही खोलना पड़ता है और न ही काटना पड़ता है। केवल तेल के पाइप के पास ही अलग नलकी लगानी पड़ती है और मोटरसाइकिल स्टार्ट हो जाती है।

इस टेक्नोलॉजी ​से बिना Petrol चलेगी बाइक, खर्चा ना के बराबर, माइलेज भी देगी ज्यादा
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एलपीजी गैस से चलने वाली बाइक दिखाते हुए ऋषिपाल।

हरिभूमि न्यूज : महेंद्रगढ़

आज पेट्रोल और डीजल (Petrol-Diesel) के रेट दिन प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। ऐसे में किसान, मजदूर कमेरा वर्ग सभी पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं। लोगों ने चार पहिया वाहनों में तो एलपीजी ( Lpg ) व सीएनजी ( Cng ) आदि गैस का प्रयोग करना शुरू कर दिया है। लेकिन मोटरसाइकिल ( Motorcycle ) या अन्य दोपहिया व्हीकल में गैस का प्रयोग नहीं हो रहा।

पर महेंद्रगढ़ जिले के ऋषिपाल ने एक देसी जुगाड़ कर रसोई गैस एलपीजी ( Lpg ) से मोटरसाइकिल चलाई है। एक किलोग्राम रसोई गैस में मोटरसाइकिल 106 किलोमीटर तक चलती है। इससे लोगों को पैसों की बचत होगी। वहीं इस बाइक से प्रदूषण भी कम होगा। ऋषिपाल ने बताया कि मोटरसाइकिल में गैस के प्रयोग से इंजन में कोई फर्क नहीं पड़ता और मोटरसाइकिल उतनी ही ताकत से काम करती है जितनी पहले पेट्रोल से करती थी। उन्होंने बताया कि जब हम बाइक में गैस का प्रयोग करते हैं तो किसी प्रकार का कोई प्रदूषण नहीं होता और कोई किसी प्रकार की स्मैल भी नहीं आती। इसको लगाने के लिए बाइक के इंजन को न ही खोलना पड़ता है और न ही काटना पड़ता है।

केवल तेल के पाइप के पास ही गैस के लिए नलकी लगानी पड़ती है और मोटरसाइकिल स्टार्ट हो जाती है। उन्हाेंने बताया कि गैस का प्रयोग करने से किसी प्रकार की कोई दुर्घटना होने का चांस नहीं है। तीन किलो गैस का टैंक बहुत ही बढ़िया लोहे की चादर से बनाया गया है। टैंक का वजन चार किलो 100 ग्राम है। आमतौर पर रसोई गैस में पांच किलो का सिलेंडर प्रयोग करते हैं, उसका वजन 3 किलो होता है, लेकिन इस टैंक का वजन ज्यादा है।

बाइक में कहां पर डलवा सकते हैं गैस

ऋषिपाल ने बताया कि राजस्थान या अन्य राज्यों में एलपीजी पंप हैं। वहां पर हम गैस रिफिल करवा सकते हैं। अन्यथा हमारी घर की रसोई का जो सिलेंडर होता है उससे भी हम मोटरसाइकिल में गैस डाल सकते हैं।

मिठी तुलसी की खेती कर भी बना चुके रिकॉर्ड

आपको बता दें ऋषिपाल नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर साइंटिस्ट (विज्ञान प्रसार नेटवर्क गवर्नमेंट) ऑफ (इंडिया) हरियाणा के डायरेक्टर हैं। वे फ्यूचर इनोवेशन फाउंडेशन के संयोजक हैं और हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के इनोवेशन सेंटर में इन्नोवेटर हैं। ऋषिपाल घर पर ही स्टीविया यानी मीठी तुलसी की खेती कर रहे हैं और नए-नए आविष्कार कर रहे हैं। ऋषिपाल ने बताया कि जल्द ही वह ऐसी मशीन बना रहे हैं जो कि आज मार्केट में पांच से छह लाख रुपये की आ रही है, लेकिन उनकी मशीन महज छह से सात हजार में बनकर तैयार होगी। जिससे 30 लीटर से लेकर 100 लीटर तक के किसी भी लिक्विड को बोटल में पैक कर सकते हैं।

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